“ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।” क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?
“ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।” क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?
प्रश्न. “ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।” क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?
उत्तर- ‘साधु’ की पहचान उसके पहनावे से नहीं बल्कि उसके व्यवहार से करनी चाहिए। भगवे कपड़े पहनने वाला हर व्यक्ति साधु नहीं होता अपितु परिवार में रहने वाला व्यक्ति भी साधु हो सकता है। साधु की पहचान निम्न आधारों पर की जा सकती है –
1. दृढ़-निश्चयी-साधु का स्वभाव दृढ़-निश्चयी होना चाहिए। उसे अपनी कथनी और करनी में अंतर नहीं करना चाहिए। अपने लिए व उसने जो नियम बनाए उसका दृढ़ता से पालन करना चाहिए; तभी दूसरे व्यक्ति भी उन नियमों का पालन करेंगे।
2. सीमित आवश्यकताएँ-साधु व्यक्ति की आवश्यकताएँ सीमित होनी चाहिए। उसे मायाजाल में नहीं फंसना चाहिए।
3. सरल स्वभाव-साधु व्यक्ति का स्वभाव सरल होना चाहिए। उसके मन में किसी के प्रति भेदभाव नहीं होना चाहिए।
4. मधुर वाणी-साधु व्यक्ति की वाणी मधुर होनी चाहिए, ताकि व्यक्ति उसकी वाणी सुनकर प्रभावित हुए बिना न रह सकें।
5. सामाजिक कुरीतियों से दूर-साधु व्यक्ति को समाज में फैली कुरीतियों से दूर रहना चाहिए। उसे संपर्क में आने वाले लोगों को भी उन कुरीतियों के अवगुणों से अवगत करवाना चाहिए। जिस व्यक्ति में उपरोक्त विशेषताएँ हों, वह गृहस्थ होते हुए भी साधु है। लेकिन भगवे कपड़े पहनकर पूजा-पाठ का दिखावा करने वाला व्यक्ति इन गुणों के अभाव में साधु होते हुए भी साधु नहीं है।
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