‘छाया मत छूना’ में कवि ‘छाया’ किसे कहता है और क्यों?
‘छाया मत छूना’ में कवि ‘छाया’ किसे कहता है और क्यों?
प्रश्न. ‘छाया मत छूना’ में कवि ‘छाया’ किसे कहता है और क्यों?
उत्तर- कवि ने अतीत के सुखों को छाया कहा है। अतीत में प्राप्त सुख हमारे वर्तमान को सुखमय नहीं बना सकते। वर्तमान जीवन में उनका कोई अस्तित्व नहीं। अतीत की छाया वर्तमान से मेल नहीं खाती, न ही यथार्थ में बदल सकती है। अतीत का सुख हमें असमंजस में लाकर खड़ा कर देता है। अत: अतीत की सुखरूपी छाया से दूर रहना ही उचित है।
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