नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
प्रश्न. नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
उत्तर- इस पंक्ति में लेखक फ़ादर बुल्के को याद कर रहा है। उनके अंतिम संस्कार में जितने लोग भी शामिल हुए थे, उन सभी की आँखें रो रही थीं। यदि लेखक अब उन लोगों को गिनने लगे, तो उस क्षण को याद करके उसकी अपनी आँखों में से आँसुओं की अविरल धारा बहने लगेगी। वह उस क्षण को स्मरण नहीं कर पाएगा और सबकुछ उसे धुंधला-सा प्रतीत होगा।
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