नेताजी का चश्मा हर बार कैसे बदल जाता था?

नेताजी का चश्मा हर बार कैसे बदल जाता था?

प्रश्न. नेताजी का चश्मा हर बार कैसे बदल जाता था?

उत्तर- हालदार साहब जब भी कस्बे में से गुजरते थे, तो वे चौराहे पर रुककर नेताजी की मूर्ति को देखते थे। उन्हें हर बार नेताजी का चश्मा अलग दिखता था। पूछने पर पान वाले ने बताया कि मूर्ति का चश्मा कैप्टन बदलता है। कैप्टन को बिना चश्मे वाली नेताजी की मूर्ति आहत करती थी, इसलिए उसने उस मूर्ति पर चश्मा लगा दिया। अब यदि कोई ग्राहक उससे नेताजी की मूर्ति पर लगे चश्मे जैसा चश्मा माँगता, तो वह मूर्ति से चश्मा उतारकर ग्राहक को दे देता था। उसके बदले में वह मूर्ति पर नया चश्मा लगा देता था। इस प्रकार हालदार साहब को नेताजी का चश्मा हर बार बदला हुआ मिलता था।

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