फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
प्रश्न. फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
उत्तर- फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी लगती थी, क्योंकि वे हर उत्सव एवं संस्कार पर बड़े भाई और धर्मगुरु की तरह शुभाषीश देते थे। उनकी उपस्थिति में प्रत्येक कार्य शांति और सरलता से संपन्न होता था। लेखक के बच्चे के मुँह में अन्न का पहला दाना फ़ादर बुल्के ने डाला था। उस क्षण उनकी नीली आँखों में जो ममता और प्यार तैर रहा था, उससे लेखक को फ़ादर बुल्के की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी लगी।
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