फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
उत्तर- फ़ादर बुल्के अपनी वेशभूषा और संकल्प से संन्यासी थे, परंतु वे मन से संन्यासी नहीं थे। संन्यासी सबके होते हैं; वे किसी से विशेष संबंध बनाकर नहीं रखते। परंतु फ़ादर बुल्के जिससे रिश्ता बना लेते थे, उसे कभी नहीं तोड़ते थे। वर्षों बाद मिलने पर भी उनसे अपनत्व की महक अनुभव की जा सकती थी। जब वे दिल्ली जाते थे, तो अपने जानने वाले को अवश्य मिलकर आते थे। ऐसा कोई संन्यासी नहीं करता। इसलिए वे परंपरागत संन्यासी की छवि से अलग प्रतीत होते थे।
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