‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ हमें क्या संदेश देता है?

‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ हमें क्या संदेश देता है?

प्रश्न. ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ हमें क्या संदेश देता है?

उत्तर- ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ एक संस्मरण है। इसके माध्यम से लेखक ‘सर्वेश्वर दयाल सक्सेना’ फादर बुल्के को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। फ़ादर बुल्के का जीवन हम भारतवासियों के लिए एक प्रेरणा है। फ़ादर बुल्के विदेशी होते हुए भी भारत, भारत की भाषा और संस्कृति से बहुत गहरे जुड़े हुए थे। उन्होंने स्वयं को सदैव एक भारतीय कहा था। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत प्रयास किए था।

हम लोगों को फ़ादर बुल्के के जीवन से यह संदेश लेना चाहिए कि जब एक विदेशी अनजान देश, अनजान लोगों और अनजान भाषा को अपना बना सकता है तो हम अपने देश, अपने लोगों और अपनी भाषा को अपना क्यों नहीं बना सकते? हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए। अपने देश और उसकी राष्ट्रभाषा हिंदी के सम्मान की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

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