‘कन्यादान’ कविता की माँ परंपरागत माँ से कैसे भिन्न है ?
‘कन्यादान’ कविता की माँ परंपरागत माँ से कैसे भिन्न है ?
प्रश्न. ‘कन्यादान’ कविता की माँ परंपरागत माँ से कैसे भिन्न है ?
उत्तर- ‘कन्यादान’ कविता की माँ परंपरागत माँ से अलग है, क्योंकि उसने बेटी को जो सीख दी है, वह परंपराओं से अलग है। वैसे तो माँ ने बेटी को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वाह करने की सलाह दी है, परंतु साथ ही उसे अपने आत्म-सम्मान के प्रति भी सचेत किया है। लीक से हटकर माँ ने आज के संदर्भ में जो समाज की वास्तविकता है, उसी के अनुरूप अपनी बेटी को सीख दी है। माँ अपनी बेटी के सुखद वैवाहिक जीवन के साथ-साथ उसकी सुरक्षा के प्रति भी आशंकित है। अतः माँ ने उसे कुछ अलग तरीके से समझाया है।
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