कवि ने अपने जीवन को कैसा माना है?
कवि ने अपने जीवन को कैसा माना है?
प्रश्न. कवि ने अपने जीवन को कैसा माना है?
उत्तर- कवि ने अपने जीवन को छोटा और सरल माना है। उसका जीवन सुखों से रहित है; उसमें सर्वत्र दुखों का वास है। प्रेम और सुख की कल्पना करना भी उसे पीड़ादायक लगता है। उसका जीवन पीड़ा की एक कहानी है। उसकी यह कहानी किसी को भी सुख प्रदान नहीं कर सकती। वह अपने जीवन को स्वयं तक सीमित रखना चाहता है।
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