कवि शिशु की माँ तथा शिशु को धन्य क्यों कहता है ?
कवि शिशु की माँ तथा शिशु को धन्य क्यों कहता है ?
प्रश्न. कवि शिशु की माँ तथा शिशु को धन्य क्यों कहता है ?
उत्तर- कवि जब अपने शिशु को काफी समय के बाद देखता है, तो उसे बड़ी प्रसन्नता होती है। कवि की अनुपस्थिति में शिशु की माँ ने ही उसका पालन-पोषण किया। उसके कारण ही शिशु की दंतुरित मुसकान को देखने का कवि को सौभाग्य मिला। यदि माँ न होती, तो शिशु का अस्तित्व ही न होता और यदि ये दोनों न होते, तो कवि को यह खुशी देखने को न मिलती। इसी कारण कवि ने माँ तथा शिशु दोनों को धन्य कहा है।
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