कैप्टन चश्मे वाले का व्यक्तित्व हालदार साहब की सोच से किस प्रकार अलग था?
कैप्टन चश्मे वाले का व्यक्तित्व हालदार साहब की सोच से किस प्रकार अलग था?
प्रश्न. कैप्टन चश्मे वाले का व्यक्तित्व हालदार साहब की सोच से किस प्रकार अलग था?
उत्तर- हालदार साहब को जब यह पता चला कि कैप्टन चश्मेवाले ने नेताजी की मूर्ति के अधूरेपन को अपने ढंग से पूरा किया है, तो वे कैप्टन की देशभक्ति के आगे नतमस्तक थे। कैप्टन नाम सुनते ही उनके दिल और दिमाग पर एक फ़ौजी की छवि अंकित हो गई। परंतु जब उन्होंने वास्तव में कैप्टन चश्मेवाले को देखा, तो हैरान रह गए। कैप्टन चश्मेवाला एक दुबला-पतला बूढ़ा था। उसकी एक टाँग नहीं थी। उसके सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा था। उसके एक हाथ में छोटी-सी संदूकची थी और दूसरे हाथ में एक बाँस पर लटके हुए चश्मे थे। इस प्रकार कैप्टन चश्मेवाले का व्यक्तित्व हालदार साहब की सोच से भिन्न था।
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