गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?

गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?

प्रश्न. गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?

उत्तर- गाँव के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में आषाढ़ चढ़ते ही विशेष उल्लास दिखाई देता है। आषाढ़ की ठंडी पुरवाई जेठ की तपती गरमी से छुटकारा दिलाती है। आषाढ़ में बारिश की रिमझिम शुरू हो जाती है। उस समय खेतों में धान की फसल की रोपाई आरंभ हो जाती है। धान की रोपाई करते समय किसान और उसका परिवार बहुत प्रसन्न दिखाई देते हैं क्योंकि यह फसल उनके सपनों को पूरा करती है। गाँव के सभी लोग खेतों में दिखाई देते हैं। चारों तरफ़ बैलों के गले की घंटियों की आवाजें, मिट्टी और पानी में छप-छप करते बच्चे तथा खेतों की मुँडेर पर आदमियों के लिए खाना लिए बैठी औरतें-यह दृश्य मन में उल्लास भर देता है। आषाढ़ में चारों ओर मेले जैसा वातावरण होता है।

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