पाषाण का पिघलना और जल बनना से कवि का क्या तात्पर्य है ?
पाषाण का पिघलना और जल बनना से कवि का क्या तात्पर्य है ?
प्रश्न. पाषाण का पिघलना और जल बनना से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर- पत्थर या पाषाण पिघलने का अर्थ है-‘ऐसा व्यक्ति जो कोमल भावनाओं से दूर है, इस सुंदर बालक का कोमल स्पर्श पाकर भावुक बन जाता है।’ कवि के अनुसार बालक की मुसकान से कठोर हृदय भी पिघलकर जल बन जाता है।
हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे ..
-
Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- BPSC Notes ————– Click Here