फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
प्रश्न. फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
उत्तर- कवि ने लाखों-करोड़ों लोगों के द्वारा किए जाने वाले परिश्रम और उनकी एकनिष्ठ लगन को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा और ‘महिमा’ कहा है। कवि कहता है कि फसल उत्पन्न करना किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है; न जाने कितने दिन-रात मेहनत करके वे इसे उगाने का गौरव प्राप्त करते हैं।
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