‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि रेम्सचैपल’-इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ। अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं ?

‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि रेम्सचैपल’-इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ। अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं ?

प्रश्न. ‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि रेम्सचैपल’-इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ। अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं ?

उत्तर- फ़ादर बुल्के का जन्म बेल्जियम के रेम्सचैपल शहर में हुआ था, परंतु उन्होंने अपनी कर्मभूमि के लिए भारत को चना। उन्होंने अपनी आयु का अधिकांश भाग भारत में बिताया था। उन्हें भारत, भारत की भाषा हिंदी तथा यहाँ के लोगों से बहुत प्यार था; परंतु वे अपनी जन्मभूमि रेम्सचैपल को कभी भूल नहीं पाए। रेम्सचैपल शहर उनके मन के एक कोने में बसा हुआ था। वे अपनी जन्मभूमि से गहरे रूप से जुड़े हुए थे। जिस मिट्टी में पलकर वे बड़े हुए थे, उसकी महक वे अपने अंदर अनुभव करते थे।

इसलिए लेखक के यह पूछने पर कि कैसी है आपकी जन्मभूमि? फ़ादर बुल्के ने तत्परता से जबाव दिया कि उनकी जन्मभूमि बहुत सुंदर है। यह उत्तर उनकी आत्मा की आवाज़ थी। हमें अपनी जन्मभूमि प्राणों से बढ़कर प्रिय है। जन्मभूमि में ही मनुष्य का उचित विकास होता है। उसकी आत्मा में अपनी जन्मभूमि की मिट्टी की महक होती है। जन्मभूमि से मनुष्य का रिश्ता उसके जन्म से शुरू होकर उसके मरणोपरांत तक रहता है। जन्मभूमि ही हमें हमारी पहचान, संस्कृति तथा सभ्यता से अवगत करवाती है। हमें अपनी जन्मभूमि के लिए कृतज्ञ होना चाहिए और उसकी रक्षा और सम्मान पर कभी आँच नहीं आने देनी चाहिए।

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