‘मन तन पर हावी हो जाता’ से क्या आशय है?

‘मन तन पर हावी हो जाता’ से क्या आशय है?

प्रश्न. ‘मन तन पर हावी हो जाता’ से क्या आशय है?

उत्तर- इस कथन का आशय है कि बालगोबिन भगत के गाए हुए पदों को दोहराते समय लोग इतने मग्न हो जाते थे कि वे अपने तन की सुध भूलकर मन से भक्ति रस में डूब जाते थे। उन्हें दीन-दुनिया की सुध नहीं रहती थी। वे मनोलोक में विचरण करने लगते थे।

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