‘मौन व्यथा’ में निहित गूढार्थ को स्पष्ट कीजिए।
‘मौन व्यथा’ में निहित गूढार्थ को स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न. ‘मौन व्यथा’ में निहित गूढार्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- ‘मौन व्यथा’ में गूढार्थ विद्यमान है। जब व्यक्ति अपने दुख-दर्द को सबके सामने बार-बार कहता है, तो कोई भी उसे बाँटना नहीं चाहता बल्कि बाद में उस पर कटाक्ष व व्यंग्य करता है। दुख-सुख सभी के जीवन के आवश्यक हिस्से हैं। यह जीवन का यथार्थ है। इसलिए कवि उन्हें दूसरों के सामने व्यक्त नहीं करना चाहता। वह उसे अपने भीतर ही छिपाकर रखना चाहता है। कई बार पूछे जाने पर व्यथित व्यक्ति अपने दुख को प्रकट कर देता है, पर कवि अपनी पीड़ा को ‘मौन व्यथा’ कहकर चुप हो जाता है।
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