Ancient History Notes in Hindi
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थानेश्वर का वर्धन वंश या पुष्यभूति वंश
* थानेश्वर हरियाणा के करनाल जिले में स्थित है.
* थानेश्वर के वर्धन वंश ने सातवीं शताब्दी ई. में उत्तर-भारत के राजनीतिक एकता का प्रयास किया.
* वर्धन शासकों ने गुप्तों के बाद कुछ समय के लिए उत्तर-भारत को एक शक्तिशाली राजवंश प्रदान किया.
* थानेश्वर के वर्धन वंश का संस्थापक पुष्यभूति था.
* प्रभाकर वर्धन वंश का एक महत्वपूर्ण शासक था.
* प्रभाकर वर्धन, वर्धन वंश को आगे बढ़ाया एवं प्रमुखता दिलाई.
* इसलिए प्रभाकर वर्धन को वर्धन वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है.
* प्रभाकर वर्धन के दो पुत्र राज्यवर्धन एवं हर्षवर्धन तथा एक पुत्री राज्यश्री थी.
* राजश्री का विवाह कन्नौज के शासक गिरी वर्मा से हुआ था.
* प्रभाकरवर्धन की मृत्यु के बाद इस परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा.
* राजश्री के पति गिरी वर्मा को मालवा के शासक देवगुप्त ने मार डाला था.
* देव गुप्त को सजा देने के लिए राज्यवर्धन मालवा आया.
* उसने देव गुप्त को मार डाला परंतु गौड़ शासक शशांक ने धोखे से राज्यवर्धन की हत्या कर दी .
* इन्हीं परिस्थितियों में राज्यवर्धन का छोटा भाई हर्षवर्धन 16 वर्ष की आयु में थानेश्वर का शासक बना.
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