Ancient History Notes in Hindi
Ancient History Notes in Hindi
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मौर्यकालीन सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति
मौर्यकालीन सामाजिक स्थिति
* मेगास्थनीज ने मौर्यकालीन समाज को 7 वर्गों में विभक्त बताया है-
यह 7 वर्ग निम्नलिखित थे-
* दार्शनिक,
* कृषक,
* पशु पालक,
* कारीगर,
* योद्धा,
* निरीक्षक
* एवं मंत्री
* मेगास्थनीज ने भारत में दास प्रथा नहीं होने की बात कही है.
मौर्यकालीन आर्थिक स्थिति
* मौर्य काल में आर्थिक जीवन का मुख्य आधार कृषि था.
* कृषि के अतिरिक्त पशुपालन, उद्योग, वाणिज्य एवं व्यापार काफी उन्नत था.
* मौर्य काल में इस्पात उद्योग एवं सूती वस्त्र उद्योग काफी विकसित था.
* सूती के नीचे वस्त्रों को दुकूल कहा जाता था.
* रेशमी वस्त्रों को छोम कहा जाता था.
* मौर्य काल में सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्के प्रचलित थे.
* सोने के सिक्के को निष्क या सुवर्ण कहा जाता था.
* चांदी के सिक्के को कशार्पण या पर्ण कहा जाता था.
* तांबे के सिक्के को मासिक कहा जाता था.
* छोटे तांबे के सिक्के को काकनी कहा जाता था.
* टकशाल के अधिकारी को लक्षणा अध्यक्ष कहा जाता था.
* मुद्रा की शुद्धता जांच करने वाला अधिकारी रूपदर्शक कहलाता था.
* भारत की प्राचीनतम मुद्रा या सिक्का आहत सिक्का थी.
* मेगास्थनीज ने शिव एवं कृष्ण पूजा का उल्लेख किया है.
* शिव के लिए मेगास्थनीज ने डायोनीसिस एवं कृष्ण के लिए हेराक्लीज शब्द का प्रयोग किया गया है.
* मौर्य काल में शिक्षा का केंद्र तक्षशिला था.
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