Hindi भाषा-विज्ञान की उपयोगिता और उसका अन्य शास्त्रों से संबंध August 9, 2022 bk959529 844 Views 0 Comments भाषा-विज्ञान की उपयोगिता और उसका अन्य शास्त्रों से संबंध, भाषा-विज्ञान से व्याकरण और साहित्य के अध्ययन में भी सुविधा होती है। Read More
Hindi भाषा-विज्ञान की शाखाएँ August 9, 2022 bk959529 1300 Views 0 Comments भाषा की परिभाषा रेखांकित करते हुए हमने जाना है कि भाषा-विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसमें भाषा, भाषा-विज्ञान की शाखाएँ Read More
Hindi भाषा विज्ञान क्या है? August 9, 2022 bk959529 428 Views 0 Comments भाषा विज्ञान क्या है?, भाषा-विज्ञान के इन दोनों रूपों को क्रम से 'व्यावहारिक रूप और 'सैद्धांतिक' रूप या कहा जा सकता है। Read More
Hindi संबंध-तत्व और अर्थ-तत्व का संबंध : August 9, 2022 bk959529 1736 Views 0 Comments संबंध-तत्व और अर्थ-तत्व का संबंध :, संबंध-तत्व और अर्थ-तत्व के संबंध सभी भाषाओं में अलग-अलग तरह के होते हैं । अस्तु संबंध के प्रकारों को समझना आवश्यक है। Read More
Hindi संबंध-तत्व के कार्य : August 9, 2022 bk959529 255 Views 0 Comments वचन-वचन प्रमुख रूप से दो हैं: एकवचन और बहुवचन । परंतु संस्कृत में तथा लिथुआनियन आदि कुछ भाषाओं में द्विवचन तथा, संबंध-तत्व के कार्य : Read More
Hindi रूप-परिवर्तन की दिशाएँ: August 9, 2022 bk959529 655 Views 0 Comments पर यथार्थत: दोनों में अंतर होता है।, रूप-परिवर्तन की दिशाएँ:, सामान्य दृष्टि से रूप-परिवर्तन और ध्वनि-परिवर्तन में अंतर नहीं दिखाई देता Read More
Hindi रूप-परिवर्तन के कारण : August 9, 2022 bk959529 876 Views 0 Comments रूप-परिवर्तन की दिशाओं को रेखांकित करने के क्रम में रूप परिवर्तन के कारणों का भी यत्र-तत्र संकेत किया गया है।, रूप-परिवर्तन के कारण : Read More
Hindi वाक्य-विज्ञान का स्वरूप August 9, 2022 bk959529 1364 Views 0 Comments भाषा का मुख्य व्यापार होता है विचारों का आदान-प्रदान । विचारों का यह आदान-प्रदान भाषा में वाक्यों द्वारा ही किया जाता है।, वाक्य-विज्ञान का स्वरूप Read More
Hindi वाक्य की परिभाषा August 9, 2022 bk959529 306 Views 0 Comments 'वाक्य शब्दों का समूह है' बोध के अंतर्गत यह स्पष्ट है कि वाक्य का शब्द-रूप में विभाजन स्वाभाविक नहीं है।, वाक्य की परिभाषा Read More
Hindi वाक्य के तत्त्व August 9, 2022 bk959529 339 Views 0 Comments भाषा सर्वत्र अपने अर्थ स्पष्ट नहीं कर पाती। ऐसे स्थलों पर निकटस्थ अवयवों को ठीक-ठीक अलग कर पाना असम्भव हो जाता है। मान लें, वाक्य के तत्त्व Read More