Modern History Notes in Hindi
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होमरूल लीग आंदोलन
* 16 जून 1914 ई. को तिलक 6 वर्ष के कारावास के पश्चात जेल से रिहा हुए.
* तथा तिलक ने एनीबेसेंट के साथ मिलकर भारत में होमरूल आंदोलन चलाने की योजना बनाई.
* होमरूल लीग की स्थापना एनीबेसेंट द्वारा आयरलैंड के होमरूल लीग के तर्ज पर बनाई गई थी.
* होमरूल लीग आंदोलन (स्वशासन आंदोलन) की व्याख्या 2 जनवरी 1914 ई. को कॉमनविल नामक समाचार पत्र में एनी बेसेंट ने किया.
* जिसमें ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के अंतर्गत स्वशासन के उद्देश्य को ध्यान में रखकर धार्मिक स्वतंत्रता, राष्ट्रीय शिक्षा, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों को अपना आधारभूत कार्यक्रम बनाया.
* सबसे पहले बाल गंगाधर तिलक द्वारा 28 अप्रैल 1916 ई. को बेलगांव (कर्नाटक) के प्रांतीय सम्मेलन से होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत हुई.
* तिलक के होमरूल लीग के अध्यक्ष जोसेफ वैपतिश्ता तथा संजीव एन.सी. केलकर थे.
* तिलक के 5 महीने बाद एनीबेसेंट ने सितंबर 1916 ई. में अपने होमरूललीग आंदोलन की शुरुआत की.
* तिलक के होमरूललीग के कार्य क्षेत्र- कर्नाटक, महाराष्ट्र (मुंबई को छोड़कर) मध्य प्रांत तथा बरार, वहीं शेष भारत एनी बेसेंट के कार्य क्षेत्र में था.
* होमरूल लीग की सर्वाधिक शाखाएं मद्रास में थी, परंतु सबसे अधिक इसकी सक्रियता मुंबई में थी.
* एनीबेसेंट ने अपने समाचार पत्र को कॉमनविल और न्यू इंडिया तथा तिलक ने मराठा एवं केसरी के माध्यम से इस आंदोलन का मार्गदर्शन किया.
* एनी बेसेंट ने जॉर्ज ऑरुंडल को अपने होमरूल लीग का संगठन सचिव बनाया.
* इनके अन्य प्रमुख सहयोगी थे- बी.पी. वाडीया तथा पी. रामास्वामी अय्यर, इन्होंने (एनीबेसेंट) मद्रास के निकट अड्यार नामक स्थान पर अपना मुख्यालय (होमरूल लीग आंदोलन) स्थापित किया .
* जवाहरलाल नेहरू, बी. चक्रवर्ती और जे. बनर्जी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए.
* होमरूल आंदोलन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित होकर ब्रिटिश सरकार ने जून 1917 ई. में एनीबेसेंट, जॉर्ज अरुंडेल तथा बी.पी. वाडिया को गिरफ्तार कर लिया.
* इस गिरफ्तारी के विरोध में सर. एस. सुब्रमण्यम अय्यर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि वापस कर दिया था.
* तथा मदन मोहन मालवीय, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे नेता भी इस आंदोलन में शरीफ हो गए.
* 1919 ई. में मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधारों की घोषणा के बाद एनीबेसेंट ब्रिटिश सरकार की समर्थक बन गई.
* तथा तिलक, इंडियन अनरेस्ट के लेखक वैलेंटाइन शिरोल के विरोध मानहानि का मुकदमा करने लंदन चले गए.
* फलत: यह आंदोलन नेतृत्वविहीन होकर समाप्त हो गई.
* गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा स्थापित संस्था- सर्वेंटस ऑफ़ इंडिया सोसाइटी के सदस्यों को होमरूल लीग आंदोलन में शामिल होने की अनुमति नहीं थी.
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