प्यास को जल दान करो, अपमानित का आदर सम्मान । विद्यादान करो अनपढ़ को, विपदग्रस्त को आश्रय दान।
वस्त्रहीन को वस्त्र दान दो, रोगी को औषध का दान। धर्म रहित को धर्म सिखाओ, शोकातुर को धीरज दान ।
भूले को सन्मार्ग बता दो, गृह-विहीन को दो गृह दान । करो सभी निस्वार्थ भाव से, मन में कभी न हो अभिमान।
इन बारह पुष्पों से, प्रभु का करता जो अर्चन और ध्यान । हो निष्काम प्रेम-युत, उसको निश्चय मिलते हैं भगवान् ।
जो बिगड़ी को बनाते हैं, उसे भगवान् कहते हैं। जो मुसीबत में काम आये, उसे इन्सान कहते हैं ।