चार का परिचय चार अवस्थाओं में मिलता है- दरिद्रता में मित्र का, निर्धनता में स्त्री का, रण में शूरवीर का और बदनामी में बन्धु-बान्धवों का ।
चार बातों में मनुष्य का कल्याण है- वाणी के संयम में, अल्प निद्रा में, अल्प आहार में और एकान्त के भगवत्स्मरण में ।
शुद्ध साधना के लिये चार बातों का पालन आवश्यक है- भूख से कम खाना, लोक प्रतिष्ठा का त्याग, निर्धनता का स्वीकार और ईश्वर की इच्छा में सन्तोष ।
चार प्रकार के मनुष्य होते हैं (क) मक्खीचूस- न आप खाय और न दूसरे को दे। (ख) कंजूस- आप तो खाय पर दूसरे को न दे। (ग) उदार- आप भी खाय दूसरे को भी दे । (घ) दाता- आप न खाय और दूसरे को दे।