जिसे हम 'बन्दर' कहकर निकृष्ट समझते हैं, उस वानर को जितना संयम और नियम है, उतना मनुष्य में कहाँ है ?
वानर चाहे जितना भी भूखा रहे, वह रामफल और सीताफल नहीं खायेगा क्योंकि इन फलों के साथ उसके आराध्य देव का नाम जुड़ा हुआ है।
"गुणों से बड़प्पन मिलता है, उच्चासन पर बैठने से नहीं।" भव्य भवन के कंगूरे पर बैठने कौआ गरुड़ नहीं हो सकता।