टीका- ध्यान रखें यश का ही टीका लगे, कलंक का नहीं । वंदनी - पति एवं गुरुजनों की वन्दना करें।
पत्ती- अपनी तथा परिवार की पत (लाज) रखें । कर्णफूल- कानों से दूसरों की प्रशंसा सुनें ।
कण्ठहार- पति के कण्ठ का हार बनें । कड़े- किसी से कड़ी बात न बोलें। छल्ले - किसी से छल न करें।
करधनी या कमरबंद- सत्कर्मों के लिये हमेशा कमर बाँधकर तैयार रहें । पायल - सभी बड़ी बूढ़ी औरतों के पाँव (चरण) स्पर्श करें।
पान या मेंहदी - लाज की लाली बनाये रखें जरा क्रोध, बुद्धि को खा जाता है। अहंकार, ज्ञान को खा जाता है ।