सदुपयोग न हो तो धन व्यर्थ है। विनम्रता न हो तो विद्या व्यर्थ है। साहस न हो तो तलवार व्यर्थ है।
परोपकार न हो तो इन्सान व्यर्थ है। अर्थ न हो तो शब्द व्यर्थ है। श्रद्धा न हो तो पूजा व्यर्थ है।
प्रेम न हो तो जीवन व्यर्थ है। आदमी आश्रय देने पर, सिर चढ़ जाता है। उपदेश देने पर, मुड़कर बैठता है।
आदमी आदर करने पर, खुशामद समझता है। उपकार करने पर, अस्वीकार करता है । विश्वास करने पर, हानि पहुँचाता है।
आदमी क्षमा करने पर, दुर्बल समझता है। प्यार करने पर, आघात करता है । दुःख के समय, सुयोग खोजता है।
आदमी सुख के समय, ईर्ष्या करता है । रोते हुए पैदा होता है, शिकायतें करते हुए जीता है और निराश होकर मर जाता है, इसी को आदमी कहते हैं।