दूसरे को देखने से पहले अपने छिद्रों को टटोलो । किसी और की बुराई करने से पहले यह देख लो कि हममें तो कोई बुराई नहीं है।
स्वयं इससे सहमत होगे कि परनिंदा से बढ़ने वाले द्वेष को त्यागकर । परमानंद प्राप्ति की ओर बढ़ रहे हो ।
अपने को जीतने की चेष्टा कर सके तो एक दिन तुम्हारा विश्वविजेता बनने का स्वप्न पूरा होकर रहेगा।
तुम अपने जितेंद्रिय रूप से संसार के सब प्राणियों को अपने संकेत पर चला सकोगे। संसार का कोई भी जीव तुम्हारा विरोधी नहीं रहेगा।