किसी बात के लिए भी अपने को क्षुब्ध न करे । मनुष्य में नहीं, ईश्वर में विश्वास करे। वह हमे रास्ता दिखाएगा और सन्मार्ग सुझाएगा।
किसी के दोषों को देखने और उन पर टीका-टिप्पणी करने के पहले अपने बड़े-बड़े दोषों का अन्वेषण करे।
यदि अपनी वाणी का नियंत्रण नहीं कर सकते तो उसे दूसरों के प्रतिकूल नहीं बल्कि अपने प्रतिकूल उपदेश करने दे ।