अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किए हैं । उन्हें एकमात्र अपनी ही प्रेरणा प्राप्त हुई है।
महान व्यक्ति अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे हैं। दूसरे से दुःख मिटाने की उन्होंने कभी आशा न रखी ।
अकेलापन जीवन का परम सत्य है ।। किंतु अकेलेपन से घबराना, जी तोड्ना, कर्त्तव्यपथ से हतोत्साहित या निराश होना सबसे बड़ा पाप है।
अकेलापन आपके निजी आंतरिक प्रदेश में छिपी हुई महान शक्तियों को विकसित करने का साधन है।