गोपियों की कौन-सी मन की बात मन में ही रह गई?
गोपियों की कौन-सी मन की बात मन में ही रह गई?
प्रश्न. गोपियों की कौन-सी मन की बात मन में ही रह गई?
उत्तर- गोपियाँ अपने हृदय की पीड़ा श्रीकृष्ण को सुनाना चाहती थीं, लेकिन निर्गुण ज्ञान के संदेश को सुनकर वे कुछ न कर पाईं। उनके वियोग से उत्पन्न पीड़ा संबंधी बात उनके मन में ही रह गई।
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