जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।

जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।

प्रश्न. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।

उत्तर- जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था, तब तक वे सोचते होंगे कि कैप्टन रौबदार व्यक्तित्व वाला इनसान है। उनके मानस पटल पर एक गठीले बदन के पुरुष की छवि अंकित होगी, जिसकी मूंछे बड़ी-बड़ी हों। उसकी चाल में फौजियों जैसी मज़बूती और ठहराव होगा। चेहरे पर तेज़ होगा। उसका पूरा व्यक्तित्व ऐसा होगा, जिसे देखकर दूसरा व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। इस तरह हालदार साहब के दिल और दिमाग पर एक फौजी की तसवीर अंकित होगी।

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