ब्राह्मणता का सोलह कलाओं में सवार होने से क्या तात्पर्य है?
ब्राह्मणता का सोलह कलाओं में सवार होने से क्या तात्पर्य है?
प्रश्न. ब्राह्मणता का सोलह कलाओं में सवार होने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर- इस कथन से तात्पर्य है कि लेखक स्वयं को पक्का ब्राह्मण समझता था। वह ब्राह्मण द्वारा किए गए सभी कार्य जैसे-पूजा-पाठ, संध्या, हवन आदि करता था। इस प्रकार वह स्वयं को इन साधनों के द्वारा ब्रह्म को जानने वाला पक्का ब्राह्मण समझता था।
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