‘श्रमरगीत’ से आपका क्या तात्यर्य है?

‘श्रमरगीत’ से आपका क्या तात्यर्य है?

प्रश्न. ‘श्रमरगीत’ से आपका क्या तात्यर्य है?

उत्तर : ‘भ्रमरगीत’ दो शब्दों-‘भ्रमर’ और ‘गीत’ के मेल से बना है। ‘भ्रमर’ छ: पैर वाला एक काला कीट होता है। इसे भंवरा भी कहते हैं। ‘गीत’ गाने का पर्याय है। इसलिए ‘भ्रमरगीत’ का शाब्दिक अर्थ है-भँवरे का गान, भ्रमर संबंधी गान या भ्रमर को लक्ष्य करके लिखा गया गान। श्रीकृष्ण ने उद्धव को मथुरा से निर्गुण ब्रह्म का ज्ञान देकर ब्रज-क्षेत्र में भेजा था ताकि वह विरह-वियोग की आग में झुलसती गोपियों को समझा सके कि श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम-भाव को भुलाकर योग-साधना में लीन होना ही उनके लिए उचित है।

गोपियों को उद्धव की बातें कड़वी लगी थीं। वे उसे बुरा-भला कहना चाहती थीं, पर मर्यादावश श्रीकृष्ण के द्वारा भेजे गए उद्धव को वे ऐसा कह नहीं पातीं। संयोगवश एक भँवरा उड़ता हुआ वहाँ से गुजरा। गोपियों ने झट से भँवरे को आधार बनाकर अपने हृदय में व्याप्त क्रोध को सुनाना आरंभ कर दिया। उद्धव का रंग भी भँवरे के समान काला था। इस प्रकार भ्रमरगीत का अर्थ है-‘उद्धव को लक्ष्य करके लिखा गया गान’। कहीं-कहीं गोपियों ने श्रीकृष्ण को भी ‘भ्रमर’ कहा है।

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