‘छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात’ का आशय स्पष्ट करो।
‘छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात’ का आशय स्पष्ट करो।
प्रश्न. ‘छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात’ का आशय स्पष्ट करो।
उत्तर- धूल-मिट्टी से सने बालक के शरीर को देखकर कवि को लगता है कि जैसे कोई कमल सरोवर को छोड़कर उसके घर में आकर खिल गया है। अपने नन्हें से बच्चे को देख कवि अति प्रसन्न है।
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