राष्ट्रवाद की अवधारणा एवं भारत

राष्ट्रवाद की अवधारणा एवं भारत

                                 राष्ट्रवाद की अवधारणा एवं भारत

             “जो भरा नहीं है भावों से. बहती जिसमें रसधार नहीं,
              वह हदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं”
                                                    
 
      राष्ट्रवाद वर्तमान युग की महाशक्ति है, एक अवधारणा या विचारधारा के रूप में राष्ट्रवाद नागरिकों में अपने राष्ट्र के प्रति अनुराग या लगाव के भाव को व्यक्त करता है राष्ट्रवादी राष्ट्र हितों को अन्य सब हितों से ऊंचा स्थान देते हैं. एक विचारधारा के रूप में राष्ट्रवाद यह मांग करता है कि राज्य का ढांचा या राजनीतिक संगठन राष्ट्रत्व की नींव पर खड़ा होना चाहिए प्रत्येक राष्ट्र को स्वाधीन राष्ट्र के रूप में प्रतिनिधित्व करना चाहिए जो लोग अपने आप को एक सामाजिक समुदाय के रूप में पहचानते हों. ‘एक राष्ट्र के सदस्य होने का दावा करते हों उन्हें अपनी पसंद की राजनीतिक प्रणाली में रहने का अधिकार होना चाहिए. उन्हें विश्व समुदाय में अन्य राष्ट्रों के बराबर दर्जा मिलना चाहिए.
 
                        राष्ट्रवाद का अभिप्राय
 
      सत्रहवीं शताब्दी में राष्ट्र शब्द का अभिप्राय राज्य की जनसंख्या से हुआ करता था चाहे उसमें जातीय एकता हो या न हो 1772 के पौलैंड विभाजन के बाद राष्ट्र काफी प्रचलित हुआ. इसका अर्थ देशभक्ति से लिया जाने लगा. 18वीं शताब्दी के अंत
में एक राजनीतिक शक्ति के रूप में इसका उदय हुआ और 19वीं शताब्दी के प्रारभ में राष्ट्र से अर्थ राजनीतिक स्वतंत्रता अथवा प्रभुसत्ता से लगाया गया चाहे वह प्राप्त कर ली हो या वाछित हो.
        राष्ट्रवाद का सीमित अर्थ एक ऐसी एकता की भावना या सामान्य चेतना जो राजनीतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, भाषायी, जातीय, सास्कृतिक व मनोवैज्ञानिक तत्वों पर आधारित रहती है. राष्ट्रवाद उस ऐतिहासिक प्रतिक्रिया का प्रतिपादन करता है जिसके द्वारा राष्ट्रीयता, राजनीतिक एककों का रूप धारण कर लेती है. यह वह भावना है जिससे प्रेरित होकर वे लोग एक निश्चित और सशक्त राष्ट्रीयता का निर्माण करते हैं और संसार में अपने लिए विशिष्ट पहचान बनाना चाहते हैं राष्ट्रवाद की भावना एक प्रकार की समूह भावना है.
 
                     राष्ट्रवाद के रूप
 
राष्ट्रवाद के कई रूप होते हैं―
◆ जातीयता पर आधारित–जर्मन में राष्ट्रवाद का यही रूप प्रचलित हुआ जर्मन जाति को संसार में शीर्ष स्थान दिलाना.
 
◆ राज्य और संविधान के प्रति निष्ठा–अमरीका और इंग्लैण्ड जैसे देशों में राष्ट्रवाद सामाजिक उद्देश्यों और संविधान के प्रति निष्ठावान बने रहने के रूप में प्रयुक्त हुआ.
 
◆ विदेशियों के प्रभुत्व से आजादी एशिया, अफ्रीका के राष्ट्रों के लिए राष्ट्रवाद राष्ट्रीय स्वतंत्रता को प्राप्त करना था.
 
◆ धर्म के साथ समीकृत-पाकिस्तान में राष्ट्रवाद की भावना मुस्लिम धर्म के साथ एकीकृत है.
 
◆ स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् राष्ट्रवाद-देश के चहुमुखी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सास्कृतिक उन्नति करने से है.
 
                  राष्ट्रवाद के निर्माण में सहायक तत्व
जातीय एकता-इग्लैण्ड में सेक्शन, नाक्रिक तथा लेटिन जातियों का सम्मिश्रण के परिणामस्वरूप राष्ट्र का निर्माण हुआ. स्विस राष्ट्र में लेटिन ट्यूटन तथा स्लोवानिक जातियों के सम्मिश्रण से स्विट्जरलैण्ड राष्ट्र का निर्माण हुआ. हिटलर के नेतृत्व में नाजी जाति ने जर्मनी को संसार में उग्र राष्ट्रवाद के रूप में स्थापित किया बाल्कन, यूरोप व इग्लैण्ड में कई
जातियों का सम्मिश्रण रहा.
 
भाषा की एकता-16वीं शताब्दी के बाद राष्ट्रीयता के विकास में भाषा ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई प्रत्येक राष्ट्र व उसमें रहने वाले लोगों ने अपनी भाषा तथा अपने साहित्य व साहित्यकारों पर गर्व किया भाषा विचार व भावों की
अभिव्यक्ति का माध्यम बना सामान्य ऐतिहासिक परम्पराओं को जीवित रखने एवं जनता में राष्ट्रीयता का भाव उत्पन्न करने में भाषा एक सशक्त माध्यम साबित हुई. परन्तु ऐसे भी राष्ट्र हैं जिनमें भाषा की विविधता हैं. जैसे―
भारत में बहुभाषीय लोग रहते हैं स्विट्जरलैण्ड के लोग तीन प्रकार की भाषा बोलते हैं.
 
धर्म की एकता― प्रारम्भ में राष्ट्रीयता के विकास में धर्म का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा. यहूदियों के लिए धर्म ही राष्ट्रीय जीवन का प्रमुख सोत रहा. तुर्को ने यूनानियों के ऊपर शताब्दियों तक अत्याचार किए, लेकिन यूनानी अपने
ग्रीक कैथोलिक चर्च के कारण राष्ट्रीयता के सूत्र में आवद्ध रहे पाकिस्तान की राष्ट्रीयता का मूल आधार इस्लाम धर्म है.
 
भौगोलिक एकता―राष्ट्रवाद के निर्माण में मातृभूमि के महत्व को बताते हुए आधुनिक राष्ट्रवादके आध्यात्मिक जनक मैजिनी ने कहा है हमारा देश अपनी सामान्य कर्मशाला है जहाँ श्रम के उपकरण और औजार जिनका हम सबसे अधिक लाभपूर्वक उपयोग कर सकते हैं, एकत्रित होते हैं देश की भौगोलिक एकता को राष्ट्रवाद का निर्माणकारी तत्व माना जाता है जैसे पवित्र नदी गंगा भारत में राष्ट्रवाद के भाव को अभिव्यक्त करती है.
 
विचारों और आदर्शों की एकता या सामाजिक संस्कृति―राष्ट्रीय साहित्य शिक्षा संस्कृति और कला राष्ट्रीयता के कारण और परिणाम दोनों है. प्रत्येक राष्ट्र राष्ट्रीय भावना को सुदृढ करने के लिए कुछ तत्वों का सृजन व आविष्कार करता है जैसे-राष्ट्र भाषा का विकास. राष्ट्रीय वेशभूषा, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय पशु पुष्प, पक्षी, आदि राष्ट्रीय गौरव के कुछ प्रतीक चुने जाते हैं राष्ट्रीय नायकों के स्मारक बनवाए जाते हैं. जिनके आगे सारा राष्ट्र नतमस्तक होता है और राष्ट्रीय इतिहास की वीर गाथाओं का चित्रण करने वाले लोकप्रिय गीतों, चित्रों, प्रतिमाओं के माध्यम से लोगों के इदय में राष्ट्र के
प्रति प्रेरणा का संचार किया जाता है.
 
कठोर व विदेशी शासन के प्रति सामान्य अधीनता इनके परिणाम-
स्वरूप राष्ट्रवाद का भाव सुदृढ होता है हिटलर और मुसोलिनी के कठोर शासनकाल में जमनी और इटली में राष्ट्रवाद काफी प्रखर हुआ यूरोप में राष्ट्रीयता का ऐसा भाव जो राजनीतिक दमन के परिणामस्वरूप आत्मचेतना के रूप में विकसित हुआ 1870 के फ्रास प्रशा युद्ध के पश्चात् फ्रांस में राष्ट्रवाद की भावना बहुत तीव हो गई नेपालियन की दमनकारी नीतियों से स्थनवासियों के हदय में राष्ट्रवाद के भाव पैदा हुए पोलेण्ड के विभाजन ने पोलेण्डवासियों के ह्रृदय में राष्ट्रवाद की आग जला दी भारत में 150 वर्षों तक अंग्रेजों के  दमनकारी शासन ने देशवासियों को स्वाधीनता के लिए संगठित होकर  राष्ट्रीय आन्दोलन करने को प्रेरित किया.
 
                      राष्ट्रवाद का इतिहास
 
राष्ट्रवाद एक आधुनिक सिद्धात है. परन्तु इसका इतिहास बहुत प्राचीन है इसके विकास क्रम को निम्नलिखित चरणों में बाँटा जा सकता है.
 
प्राचीन यूनान-कबाइली वर्ग की एकता ने राजनीतिक रूप धारण किया यूनान के नगर राज्यों में स्थानीय देशभक्ति विद्यमान थी.
 
रोम-रोम साम्राज्य अपनी सार्वभौमिक सांस्कृतिक विविधता के कारण राष्ट्रीयता का भाव विकसित नहीं कर सका. क्योंकि इन नगर राज्यों की अपनी- अपनी विशिष्ट स्थानीय संस्थाएँ थी.
 
मध्य युग-यूरोपियन इतिहास में मध्य युग राष्ट्रवाद के उत्थान के लिए  उपयुक्त समय नहीं था, क्योंकि सामत- वाद चरम सीमा पर था अत राष्ट्रवाद की भावना का उदय नहीं हो सका लेकिन मध्य युग के अत में इटली के दांते ने और इग्लैण्ड में चौसर ने मातृभाषा का प्रयोग किया राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की भावना को प्रेरणा दी मध्य युग के अंत व आधुनिक युग के प्रारंभ में मैकियावली को आधुनिक काल का प्रथम राष्ट्रवादी कह सकते है उसने इटली में राष्ट्रवाद को प्रमुख तत्व माना इंग्लैण्ड, स्पेन और फ्रांस में राष्ट्रवाद की भावना धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी इग्लैण्ड और फ्रांस में
शतवर्षीय युद्ध प्रारंभ हुआ इसके कारण दोनो देशों में राष्ट्रवाद की भावना तेजी से फैलने लगी फ्रास में जॉन ऑफ आर्क राष्ट्रीय भावना का जीवित प्रतीक बना. उसने अपने बलिदान द्वारा यह प्रकट किया कि जब कोईराष्ट्र जाग
उठता है तब अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माण करना चाहता है और किसी अन्य देश की अधीनता में नहीं रहना चाहता है स्पेन में धर्मयुद्धों ने राष्ट्रवाद की भावना के विकास में प्रभुर योगदान दिया.
 
नवजागरण और धर्म सुधार आन्दोलन-इन दोनो आन्दोलनों नेई के सार्वभौन  राज्य का सपना पूर कर दिया धर्न सुधार आयोजनो ने राष्ट्रीय नरेशों का  समर्थन किया तथा प्रजाजनों को उनकी आशा का पालन करने को बाध्य किया 
इग्लैण जर्मनी और शान में धार्मिक और वैधानिक गुदर बस्टफेलिया की संधि ने राष्ट्रीय राज्यों की व्यवस्था को सबसे पहले खुली मान्यता दी.  17वीं शताब्दी में स्पेन, स्वीडन, नार्वे, डेनमार्क, फ्रास, पुर्तगाल आदि में  राष्ट्रवाद के बीज फूटने लगे 1772 में पोलैण्ड विभाजन ने राष्ट्रवाद के  सिद्धात को पुन सामने ला दिया.
 
अमरीका, फ्रांस की क्रांतियों-इन क्रांतियों ने लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद की भावना को प्रकट किया और यह प्रमाणित कर दिया कि जनता पर उनकी इच्छा के विरुद्ध शासन नहीं किया जा सकता है, शासन को जनता का सहयोग अपेक्षित है. नेपोलियन विजय व युद्धों ने फ्रांस के क्रांति के सदेश को इंग्लैण्ड, जर्मनी, इटली, रूस, आस्ट्रिया व हॉलैण्ड आदि देशों में पहुँचाया इन देशों में भी राष्ट्रवाद की भावना प्रज्ज्लवित हो उठी जर्मनी के फिक्टे. हीगल और ट्रीटश्के ने राष्ट्रवाद की भावना उत्तेजित की बिस्मार्क की रक्त व लोहनीति द्वारा प्रशा की अधीनता ने जर्मनी का एकीकरण किया और राष्ट्रवाद को व्यवहारिक रूप प्रदान किया.
 
                एशिया, अफ्रीका में नवराष्ट्रवाद
 
◆ पूर्वी देशों में जापान में मैजनी युग में अभूतपूर्व राष्ट्रवाद का उदय हुआ और रूस को पराजित कर अद्भुत राष्ट्रीय शक्ति का परिचय दिया गया 19वीं शताब्दी में चीन और भारत में भी राष्ट्रीय आन्दोलनों का उदय हुआ. 18वीं और
19वीं शताब्दी में फ्रास इग्लैण्ड, हॉलैण्ड और पुर्तगाल आदि पश्चिम देशों ने एशिया और अफ्रीकी के अनेक भागों में अपने उपनिवेशों की स्थापना की विदेशी अत्याचारों और पाश्चात्य विचार- धाराओं के परिणामस्वरूप इन देशों में राष्ट्रीय आन्दोलन उठ खड़े हुए भारत, लका, वर्मा, चीन मिश्र, ईरान, सउदी अरब, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि एशियाई देशों ने स्वतत्रता प्राप्त की अफ्रीका महाद्वीप में भी राष्ट्रवाद की किरणें तेजी से फैलने लगी जो अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के आकर्षण का केन्द्र रहा.
 
◆ बीसवीं सदी-बीसवीं सदी के प्रारम्भिक वर्षों में अधिकांश बाल्कान राज्यों में राष्ट्रवाद की प्रखर भावना के परिणाम स्वरूप स्वतत्रता प्राप्त कर ली. पोलैण्ड, कोस्लोवाधिया. यूगोस्लाविया तथा रूमानिया आदि नए राष्ट्रों का उदय
हुआ रूम मे 12124 साल काति के फलस्वरूप बोल्लीनिक शासन का जन्म हुआ. जर्मनी में नाजीवाद और इटली में काशीवाद दोनोआक्रामक राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति में वितीय विश्व युद्ध में सभी सम्बद्ध पक्षों ने राष्ट्रीय विदार धाराओं में अपने राष्ट्र के हित साधन की पूर्ति को प्रधानता दी.
 
◆ राष्ट्रीय आत्मनिर्णय का सिद्धान्त-यह सिद्धान्त प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1921 में वर्साय की संधि के बाद बनाया गया था इस सिद्धात का आशय है प्रत्येक राष्ट्र को अपने राजनीतिक भाग्य के निर्णय का अधिकार है 1815 में वियना की कांग्रेस के बाद एक राष्ट्रीयता एक राज्य सिद्धात यूरोपीय राजनीति का प्रधान सिद्धात रहा राष्ट्रपति विल्सन इस सिद्धांत के प्रबल समर्थक थे. प्रथम विश्व युद्ध के बाद अन्तर्राष्ट्रीय शांति के चौदह सूत्री कार्यक्रम में इसे सम्मिलित किया गया जे एस मिल ने भी इस सिद्धांत का समर्थन किया.
 
                    राष्ट्रवाद का महत्व, लाभ, गुण
 
◆ राष्ट्रवाद एक महान् सयोगी तत्व के रूप में देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाला प्रमुख तत्व है एकता और स्वतंत्रता के वाहन के रूप में एवं समन्वयकारी सृजनात्मक शक्ति के रूप में है.
 
◆ शक्तिशाली राष्ट्रीय का उत्थान राष्ट्रवाद के फलस्वरूप हुआ 19वीं और 20वीं शताब्दी में राष्ट्रवाद सर्वोच्च शिखर पर पहुँच गया.
 
◆ पश्चिम में लोकतंत्र के विकास की दिशा में इसे पहला कदम माना जा सकता है.
 
◆ साम्राज्यवादी प्रभुत्व व उपनिवेशवाद से मुक्ति राष्ट्रवाद के प्रभाव से मिली तुर्की और आस्ट्रिया जैसे विशाल साम्राज्यों पर पक्षाघात कर नए राष्ट्रीय राज्यों के उत्कर्ष में सहायता प्रदान की.
 
◆ राष्ट्रवाद एक नैतिक आधार भी है जिस प्रकार व्यक्ति राष्ट्र का अग है उसी प्रकार राष्ट्र विश्य समाज का अंग है.
 
◆ राष्ट्रवाद शातिपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय समाज के निर्माण में रचनात्मक योगदान देता है शांतिपूर्ण राष्ट्रवाद भवन की पहली मंजिल है और दूसरी मंजिल अन्तर्राष्ट्रीय विकास है राष्ट्रवाद सम्पूर्ण विश्व के लिए लाभदायक है.
 
                राष्ट्रवाद के अवगुण व दोष
 
◆ राष्ट्रवाद विकृत होकर विस्तारवादी आक्रामक व उग्र साम्राज्यवादी नीति एव विश्व शांति का सहारक भी बन जाता है रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे एक प्रकार की बर्बरता बताया है. राष्ट्रवाद एक दुधास तलवार के रूप में है जो दोनो ओर से काटती है इसका एक पक्ष रचनात्मक एवं दूसरा संहारात्मक है.
 
◆ राष्ट्रवाद व्यक्ति पर ध्यान केन्द्रीय करने की सलाह देता है वहीं अन्तर्राष्ट्रवाद उसे अपने राष्ट्र से आगे बढ़कर सम्पूर्ण मानवता के बारे में सोचने को प्रेरित करता है.
 
◆ राष्ट्रवाद ने सैनिकवाद को प्रबल बनाया है इसके द्वारा सबल राष्ट्रों में शक्ति- शाली बनने की प्रतिस्पर्धा जगती है, परिणामस्वरूप सैन्यकरण को बल मिलता है जिनके फलस्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध हुए.
 
◆ विकृत राष्ट्रवाद विश्व शाति के मार्ग में बाधक है अहकारी राष्ट्रवाद के प्रभाव में देश का बहुसंख्यक वर्ग अल्पसंख्यकों के हितों पर प्रहार करता है उनके प्रति असहिष्णु बनकर देश में वैमनस्यता का भाव पैदा करता है रवीन्द्रनाथ टैगोर
ने राष्ट्रवाद को शोषण की संगठित शक्ति बताया है.
 
◆ राष्ट्रवाद से सास्कृतिक पक्ष का खण्डन हुआ है, क्योंकि राष्ट्रवाद ने यात्रिक रूप से सभी व्यक्तियों को एक ढांचे में ढालने का प्रयास किया है, जिसमें व्यक्तियों को अपने विकास का पूर्ण अवसर नहीं मिल पाता है.
 
◆ राष्ट्रवाद जातीयता का अवांछनीय रूप धारण करके दूसरे राष्ट्रों से अपने को श्रेष्ठ मानने लगता है यूरोप में गोरी जातियों ने राष्ट्रवादी विचारधारा से अपने साम्राज्यवाद के औचित्य को सिद्ध कर दिया.
 
                 भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण
 
◆ 1857 की क्रांति-प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसे सैनिक विद्रोह की संज्ञा दी गई.
 
◆ सामाजिक व धार्मिक आन्दोलन- 19वीं सदी के प्रारम में सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में ब्रह्म समाज, आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन  थियोसोफिकल सोसायटी, प्रार्थना समाज आदि ने जनता में फैले अधविश्वास. कुप्रथाओं की
मानसिकता से ऊपर उठकर राष्ट्रीयता के सूत्र के बाधने में भूमिका निभाई.
 
◆ मुस्लिम सुधारवादी आन्दोलन-सैयद अहमद बरेलवी ने वहादी आन्दोलन के द्वारा ब्रिटिश विरोधी भावनाएँ जाग्रत कर मुस्लिम समाज को संगठित किया मोहम्मद इकबाल ने सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा गीत के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना विकसित की.
 
◆ ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीति-इसमें लॉर्ड लिटन का दमनकारी शासन- काल 1876-1880 में अपनी कार्यशैली से भारतीयों में अंग्रेजी शासन के प्रति असंतोष की लहर पैदा कर दी इसी काल में 1877 में दिल्ली में भव्य दरबार
का आयोजन ऐसे समय पर किया गया, जब दक्षिण भारत अकाल और महामारी से जूझ रहा था वर्नाक्यूलर एक्ट, आर्स एक्ट, अफगान युद्ध और अग्रेजो द्वारा देश का आर्थिक शोषण ने भी देश- वासियों में राष्ट्रीयता का भाव पैदा किया.
 
◆ संचार व यातायात के साधनों का विकास यद्यपि ब्रिटिश सामाग्य को सुदृढ करने के लिए इनका विकास किया गया था परन्तु इन साधनों ने देश की विशाल जनता को एकता के सूत्र में बाधकर भौगोलिक एकता को सुदृढता प्रदान की.
 
◆ पाश्चात्य शिक्षा व संस्कृति-यद्यपि अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार-प्रसार अग्रेजों ने अपने हितों की पूर्ति के लिए किया था पर पाश्चात्य राजनीतिक विचारकों जैसे बैंधम, जॉनलॉक, रूसो, हबर्ट स्पेन्सर आदि के व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अधिकार व राज्य के नियंत्रण की सीमितता के विचारों ने देश की जनता को प्रेरित किया.
 
◆ भारतीय प्रेस व साहित्य-भारतीय समाचार पत्रों व साहित्यों ने राष्ट्रीय आन्दोलन में प्राण फूक दिए सवाद कौमुदी, मिरात उल अखबार, इण्डियन मिरर, बन्दे मातरम्, मराठा व केसरी आदि भारतीय राष्ट्रवाद का दर्पण बन गए बकिमचन्द्र चटर्जी का आनन्द मठ क्रांतिकारियों के लिए गीता बन गया और वन्दे मातरम् ने भारतीय जनता में राष्ट्रवाद की भावना कूट कूट कर भर दी.
 
◆ आर्थिक कारण-सोने की चिडिया कहलाने वाला देश ब्रिटिश काल में गरीबी व पिछडेपन की गर्त में जाने लगा देश का धन इग्लैण्ड की ओर जाने लगा डी ई वाचा के अनुसार ब्रिटिश शासन ने देश की आर्थिक व्यवस्था को इस हद तक विगाड दिया कि धार करोड भारतीय दिन में एक बार खाना खाकर संतुष्ट होते थे.
 
◆ इल्बर्ट बिल-1883 में लॉर्ड रिपन के शासनकाल में लाया गया इसके द्वारा यूरोपीयों के ऊपर मुकदमा की सुनवाई का अधिकार भारतीय मजिस्ट्रेटों से छीन लिया गया इनमें राष्ट्रीय चेतना के विकास में योगदान दिया.
 
                    भारत में राष्ट्रवाद : अवधारणात्मक विश्लेषण
 
भारत में राष्ट्रवाद का उदय कोई निश्चित घटना का परिणाम नहीं है बल्कि सदियों से चले आ रहे असंतोष का परिणाम है भारत में राष्ट्रवाद की भावना प्राचीनकाल से ही विरामान रही है प्राचीनकाल में हिन्दुओं के चार माम, पवित्र नदियो, धर्म, 
संस्कृति, शतिरिवाज व सास्कृतिक परम्पराओं ने देश को राष्ट्रीयता के सूत्र में बाँधा  वैदिक काल में अधर्ववद में कहा है “वरुण राष्ट्र को अविचल करे, वृहस्पति राष्ट्र को  स्थिर करे, इन्द राष्ट्र को सुदृढ करे और अग्निदेव राष्ट्र को निस्चल कार से धारण  करे भारत में बौद्धिक पुनर्जागरण आधुनिक भारतीय राष्ट्रवाद के उदय का महत्वपूर्ण  कारण था राष्ट्रवाद के प्रसार और प्रभाव से स्वराज्य प्राप्ति की लालसा बलवती होती  गई और अंत में राष्ट्रवादी विचारधारा ने ही भारत को स्वतन्त्रता दिलाई राष्ट्रवाद को  आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करने वाले विचारको में स्वामी विवेकानन्द, विपिन चन्द्र पाल और अरविन्द घोष ने राष्ट्रवाद को एक नई दिशा दी उन्होने विश्व बालय सर्वहितकारी  प्रयोजनों के प्राचीन भारतीय आदर्श को अन्तर्राष्ट्रीयता का बाधक न बनाकर उसका  सहयोगी बना दिया उनकी विचारधारा पाश्चात्य राष्ट्रवादी चितन की सकीर्णताओं  से हटकर मानवतावादी विचारधारा व व्यक्तिगत अधिकारी पर केन्द्रित थी.
 
         राष्ट्रवाद के बारे में विदेशियों द्वारा लाया गया यह भमपूर्ण विचार की भारत कभी राष्ट्र नहीं था गलत साबित हुआ भारत की अपनी सभ्यता, संस्कृति पृथक भौगोलिक अस्तिल की गरिमा तथा भारत का एकीकरण करने वाले मौर्यकालीन व गुप्तकालीन साम्राज्य के चक्रवर्ती समाटो ने देश को एकता के सूत्र में बाधा भारत में विविधता होते हुए भी एकता है यह विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों जिसमें मुगलकाल में महाराणा प्रताप तथा छत्रपति शिवाजी के समय राष्ट्रीय भावना की जागति के अवसर उपस्थित हुए ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध नवजागरण के अवसर पुन उपस्थित हुए 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रवाद की भावना का ही परिणाम था.
 
          भारतीय दौद्रिक नवजागरण में राष्ट्रवाद के विचारों का पूर्ण दर्शन दयानंद सरस्वती के विचारों में दिखाई देता है यद्यपि आधुनिक भारत का जनक राजा राममोहन रॉय को माना जाता है पर उनक विचार पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित थे दयानंद सरस्वती ने देदो की महानता के विचार द्वारा भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने तथा अपने देश के प्रति श्रद्धा एवं अपने धर्म के प्रति महत्ता का भाव पैदा करके प्रत्येक भारतीय को गर्द से मस्तक ऊचा उठाकर चलने की प्रेरणा दी हिन्दी को राष्ट्रभाष का पद प्रदान करके उन्होंने राष्ट्रीय संग्राम को अपनी स्वयं की राष्ट्रीय भाषा दी आर्य समाज केदल धर्म
सुधार व समाज सुधार आदोलन ही नहीं था बल्कि एक ऐसा राष्ट्रीय आंदोलन था जिसने भारत की बहुसंख्यक जनता में पौरुष पैदा कर विदेशी सत्ता का प्रतिकार करने के लिए नवीन राजनीतिक विकल्प सुझाया.
 
        स्वामी विवेकानन्द भी राष्ट्रवाद के अग दूतों में है उनके द्वारा प्रतिपादित राष्ट्रवाद का आध्यात्मिक विचार राष्ट्रीय चिंतन की एक अनुपम देन है जिसमें स्वतंत्रता संबंधी विचार स्वराज्य का प्रतीक बन गए. दादाभाई नौरोजी ने राष्ट्रवाद को आर्थिक आधार प्रदान किया. उन्होंने अग्रेजी साम्राज्य की वित्तीय नीति को बहिर्गमन सिद्धांत के द्वारा भारतीयों के आर्थिक, राजनीतिक, प्राकृतिक अधिकारों की मांग की. महादेव गोविन्द रानाडे ने मराठों के इतिहास को भारतीय राष्ट्रीयता का सोत बताया. लोकमान्य तिलक ने राष्ट्रवाद को धार्मिक आधार प्रदान किया और धर्म को राष्ट्रीयकरण एवं देशभक्ति की भावना जाग्रत कर जनता को स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए प्रेरित किया गाधीजी ने भी राष्ट्रवाद का समर्थन किया. मोतीलाल नेहरू राष्ट्रवाद को व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास का साधन मानते थे पडित जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्र के आत्मनिर्णय सिद्धात धर्म- निरपेक्षता का समर्थन किया पर उन्होंने राष्ट्रवाद की संकीर्ण विचारधारा को विश्वशांति के लिए खतरा भी बताया रवीन्द्रनाथ टैगोर भारतीय राष्ट्रवाद के शांतिप्रिय व समन्वय- कारी स्वरूप के दर्शन को स्वीकार करते हुए सकीर्ण राष्ट्रवाद के स्थान पर अन्तर्राष्ट्रीयवाद व मानवतावाद का विचार प्रकट किया.
 
          सारांश के रूप में राष्ट्रवाद मानवता से और विश्व के लिए एक अद्वितीय वरदान सिद्ध होगा यदि वह देशप्रेम का पर्यायवाची हो सके सभी राष्ट्रों को संकीर्ण या उग्र राष्ट्रवाद के विचार से बचते हुए विश्वशाति व मानवता के हित में इस अवधारणा को अपनाना चाहिए.

Amazon Today Best Offer… all product 25 % Discount…Click Now>>>>

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *