रूपांतर है सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

रूपांतर है सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

प्रश्न. रूपांतर है सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

उत्तर- कवि कहता है कि फसल केवल मनुष्य के परिश्रम का परिणाम नहीं है। प्रकृति भी इसमें सम्मिलित है। सूर्य की किरणें इसे प्रकाश देती हैं; अपनी ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे फसलें उत्पन्न होती हैं। फसल प्रकृति से अपना भोजन प्राप्त करती हैं और बढ़ती हैं। हवा उन्हें थिरकन प्रदान करती है, तभी उसमें बीज बनता है और दानों के रूप में हमें प्राप्त होता है।

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