समय प्रबंधन की कला

समय प्रबंधन की कला

                          समय प्रबंधन की कला

जीवन में समय एक ऐसा धन है, जिसके गुजरने पर इसे कोई भी कीमत देकर वापस नहीं खरीदा जा सकता. हमेशा सभी कार्यों को समय पर करने से महान् व्यक्तियों ने उपलब्धियों की जिस ऊँचाई को छुआ वे आज मील के स्तम्भ है, एक
इतिहास है.
          इस दुनिया में अपने जीवन में सफल कौन नहीं होना चाहता है. हर इन्सान को सफलता की चाहत होती है, किन्तु सफलता पाना इतना आसान नहीं होता है. हकीकत में जीवन में सफल होने की कई एक शर्ते हैं, जिनका हमें शिद्दत से पालन करना होता है और समय का सदुपयोग उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है, जो कि हमें सफल होने के लिए विविध तरीकों से मदद करता है. अव्वल तो समय एक ऐसा संसाधन है, जिसके एक बार बीत जाने के बाद कभी भी दोबारा नहीं लौटाया जा सकता है. ऐसा कहा जाता है कि समय की मूर्ति के मस्तक पर पीछे की तरफ बाल नहीं होते हैं. उसके मस्तक के आगे ही बाल होते हैं अर्थात् समय को पीछे से कभी भी नहीं पकड़ सकते हैं. समय को पकड़ने के लिए हमें उसे केवल आगे की तरफ से ही पकड़ना पड़ेगा. इसका यह भी आशय है कि गुजरे वक्त को कभी भी दोबारा नहीं पाया जा सकता है. आधुनिक प्रबन्ध सिद्धान्त में समय प्रबन्धन को जीवन प्रबन्धन माना जाता है. अपनी दिनचर्या को समय पर निष्पादित करना तथा समय का अपने जीवन में कामयाबियाँ पाने के लिए प्रयोग करना ही समय का निष्ठा के साथ पालन कहलाता है, जिसे कि
समय प्रबन्धन कहते हैं.
        यहाँ पर एक अति महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि आखिर हम अपने जीवन में उपलब्ध समय का पालन कैसे करें, ताकि हमें अपने लक्ष्यों तक पहुँचने में कोई परेशानी नहीं हो और हम अपने जीवन का कुशलतापूर्वक प्रबन्धन करते हुए अपने कैरियर सेटलमेंट में उत्कृष्ट सफलता पा सकें.
 
जीवन में एक निश्चित लक्ष्य होना चाहिए
       जब हमारे जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं होता है, तो हम वैसी स्थिति में समय की सबसे अधिक बर्बादी कर रहे होते हैं, क्योंकि हमारे पास यह निर्धारित नहीं होता है कि जीवन के किसी निश्चित समय में हमें करना क्या है. मानकर चलिए कि यदि हमें यहीं नहीं पता हो कि हमें जाना कहाँ है, तो हम अपने समय का सदुपयोग तथा उचित तरीके से प्रबन्धन कदापि नहीं कर सकते हैं. लिहाजा यह आवश्यक है कि निश्चित रूप से अपने जीवन का एक उद्देश्य तय करना चाहिए. यह निर्धारित करना होगा कि हम जीवन में पाना क्या चाहते हैं. इस प्रकार के निश्चित लक्ष्य के अभाव में समय का कभी भी सदुपयोग नहीं किया जा सकता है.
 
अपने कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करें
        हम अपने दैनिक जीवन में विविध प्रकार के कार्यों को निष्पादित करते हैं तथा उसके लिए योजना भी बनाते हैं, किन्तु सच में ये सभी कार्य समान रूप से महत्वपूर्ण नहीं होते हैं. लिहाजा अपने कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कई श्रेणियों में विभक्त कर लेना चाहिए. यथा कौन-सा काम अति आवश्यक है, कौन-सा काम आवश्यक है तथा कौन-सा काम बिलकुल महत्वपूर्ण नहीं है. ऐसी स्थिति में समय का सबसे अधिक सदुपयोग किया जा सकता है, क्योंकि ऐसी दशा में हमें यह पता होता है कि एक निश्चित समय में जीवन के सबसे अधिक अनिवार्य कार्यों को ही निष्पादित करना है. ऐसा करके हमेशा ही सफलता पाई जा सकती है.
 
मन में किसी दुविधा को जन्म न दें
          मानव जीवन में सफलता पाने की राह में सबसे बड़ा अवरोध है दुविधा’, जिसके कारण अपनी कामयाबियों के सफर में बड़ी तेजी से आगे नहीं बढ़ा जा सकता है. सोच कर देखिए कि जिस कार्य को हम कर रहे हैं या फिर करने की योजना बना रहे हैं और उसी के बारे में सन्देह हो कि वह कार्य करना भी चाहिए या नहीं या फिर आपको यह चिन्ता सता रही है कि इस कार्य में आप सफल भी होंगे या नहीं तो फिर केवल अपने अमूल्य समय की ही बर्बादी कर रहे होते हैं. इसीलिए यह अति आवश्यक है कि हमें अपने लक्ष्यों तथा सपनों के प्रति पूरी तरह से समर्पित तथा निष्ठावान होना चाहिए
तथा मन में हमेशा यह अडिग विश्वास रखना चाहिए कि हम अपने प्रयासों में अवश्य ही सफल होंगे.
          यहाँ पर एक प्रश्न काफी महत्वपूर्ण है कि आखिर हमारे अपने जीवन में दुविधा उत्पन्न होती ही क्यों हैं? हमारे जीवन में दुविधाएँ या फिर संशय अपने आत्मविश्वास में कमी के कारण उत्पन्न होते हैं, जब हमें यह लगता है कि जिस लक्ष्य की प्राप्ति की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और उसमें सफल होना आसान नहीं है, तो पैर उस राह में डगमगाने लगते हैं. फिर उन सपनों को साकार करने की कोशिश तो करते हैं, किन्तु उसमें पूरी तरह से समर्पित नहीं हो पाते हैं और इस प्रकार बेशकीमती वक्त बिना किसी उपलब्धि के बर्बाद हो जाता है. लिहाजा यह अनिवार्य है कि अपने जीवन का जो भी लक्ष्य एक बार निर्धारित कर लिया जाए तो फिर उसके बाद उसके प्राप्त होने के बारे में कभी भी मन में किसी सन्देह को जन्म नहीं दें और इस प्रकार की सोच के साथ जब आगे बढ़ेंगे, तो हमारा समय कभी भी जाया नहीं होगा.
 
अपने कार्यों को निष्पादित करने की एक समय सीमा तय करें
      क्या आपने कभी यह सोचा है कि हम आज के काम को कल पर तथा कल के काम को परसों पर क्यों टालते रहते हैं ? या फिर हेमिंग्वे सरीखे विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार की तरह किसी कार्य को सम्पादित करने के लिए अन्तिम तारीख का इन्तजार क्यों करते रहते हैं ? इन प्रश्नों का यही उत्तर है कि हम अपने कार्यों को निष्पादित करने के लिए किसी समय-सीमा को तय नहीं कर पाते हैं और हमेशा यही सोचते रह जाते हैं कि अमुक कार्य को किसी और दिन कर लेंगे और एक दिन ऐसा भी आता है, जबकि हमारे पास सब कुछ होता है और यदि कुछ नहीं होता है, तो वह वक्त नहीं होता है. फिर कल तो कभी भी नहीं आता है. लिहाजी इस बात को हमेशा सुनिश्चित करें कि किसी कार्य को कब तक पूरा कर लेना है. ऐसी परिस्थिति में निश्चित रूप से समय का सबसे अधिक सदुपयोग किया जा सकता है.
 
हमेशा परफेक्ट बनने की कोशिश नहीं करें
          कहते हैं कि इस दुनिया में कोई भी इन्सान पूर्ण नहीं होता है अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति में कुछ-न-कुछ कमी अवश्य होती है. ऐसा भी कहा जाता है कि गलतियाँ करना स्वाभाविक तथा मानवीय है, जिसका आशय यह है कि किसी कार्य को सौ फीसदी पूर्णता के साथ कभी भी अंजाम नहीं दिया जा सकता है. इसीलिए किसी काम को पूरी परिशुद्धता से करने की कोशिश करने के इन्तजार में अमूल्य समय को बर्बाद करते रहने के पाप से हमें बचे रहने की जरूरत है, लेकिन इसका अर्थ कदापि भी यह नहीं है कि अपने कार्यों को बेतरतीब तरीके से किया जाए, आशय यह है कि जो भी कार्य किया जाए उसके साथ उपलब्ध समय को ध्यान में रखते हुए यही सोच कर हर काम को उसके निर्धारित समय पर खत्म कर देना चाहिए कि हर सम्पादित कार्य में चाहे वह कितना ही उत्कृष्ट क्यों न हो हमेशा किसी-न-किसी सुधार की गुंजाइश जरूर होती है.
 
प्रातःकाल में जगें
       अर्नेस्ट हेमिंग्वे की एक मशहूर पुस्तक है-दी ओल्ड मेन एण्ड दी सी इस पुस्तक में एक बूढा मछुआरा और एक बच्चा होता है. बूढे मछुआरे से एक बच्चा यह प्रश्न पूछता है कि बूढ़े व्यक्ति प्रायः इतनी सुबह क्यों जग जाते हैं ? वह वृद्ध मछुआरा बच्चे के इस सारगर्मित प्रश्न को सुनकर हतप्रभ रह जाता है और जवाब देता है, “अपने दिन को लम्बा करने के लिए”. उस मछुआरे के इस जवाब में जीवन में सफल होने के लिए बड़ी बातें एवं दर्शन निहित है इस दुनिया में सभी इन्सानों के पास एक दिन तथा रात में महज चौबीस घण्टे ही होते हैं, किन्तु इस चौबीस घण्टे के समय को करिश्माई तरीके से बढ़ाया जा सकता है, यदि अन्य लोगों की तुलना में दो-तीन घण्टे पूर्व जगा जाए. तो इसका यही अर्थ हुआ कि उपलब्ध चौबीस घण्टों की अवधि में अतिरिक्त उतने घण्टे बढ़ा लिए गए हम कितने घण्टे सोते हैं, यह हमारी आदत में शामिल होता है, अर्थात् यदि हम अपने अनावश्यक रूप से सोने की आदत पर नियन्त्रण पा लें तो कोई शक नहीं कि अपने समय पर विजय पा सकते हैं. इस प्रकार की सोच के साथ यदि अपने दैनिक जीवन के कार्यों को अंजाम दिया जाए. तो कोई शक नहीं कि समय की बर्बादी को बड़ी आसानी से रोका जा सकता है तथा जीवन को सफल बनाया जा सकता है एवं मनचाही सफलता प्राप्त की जा सकती है.
 
दोस्तों से बचने की कोशिश करें
        एक अच्छा मित्र एक अच्छा पथप्रदर्शक होता है, क्योंकि ऐसे मित्र कठिन परिस्थितियों में हमारी मदद करते हैं तथा हिम्मत बढ़ाते हैं, किन्तु दुर्भाग्यवश ऐसे सच्चे मित्र वर्तमान परिवेश में कम ही मिल पाते हैं और नतीजा यह होता है कि हम ऐसे दोस्तों से घिर जाते हैं, जोकि हमारी समस्याओं में मदद करने की बजाए हमारे लिए मुसीबतें खड़ी कर देते हैं मित्रों की मण्डली समय को बर्बाद करने का सबसे आसान तरीका है. इसीलिए यदि हम अपने समय के सदुपयोग के बारे में संजीदगी से सोच रहे हैं, तो हमें अपने दोस्तों के चयन में बुद्धि तथा विवेक से काम लेना पड़ेगा. सबसे पहले तो हमें अपने दोस्तों की संख्या कम करनी पड़ेगी तथा दूसरी बात यह है कि हमें अपने अच्छे दोस्तों के चयन के बारे में बड़ी सावधानी रखनी होगी.
 
अपने कार्यों के प्रति सच्ची लगन पैदा करें
          एक बार महान् दार्शनिक सुकरात के पास एक व्यक्ति आया और उनसे जीवन में सफलता का रहस्य पूछा. सुकरात उस व्यक्ति को अगले दिन नदी के बीच ले गए, जब नदी का जलस्तर उस व्यक्ति के नाक तक आ पहुँचा तथा उसे साँस लेने में कठिनाई महसूस होने लगी, तो वह साँस लेने के लिए छटपटाने लगा, किन्तु सुकरात तब भी उसकी गर्दन पानी के अन्दर डुबोते रहे. अन्त में जब उन्हें लगा कि साँस नहीं लेने के कारण उस व्यक्ति की जान जा सकती है, तो उन्होंने उसे नदी से बाहर निकाला. सुकरात ने उस व्यक्ति से कहा कि जब वह नदी में साँस लेने के लिए जिस तरीके से तड़प रहा था, वैसी ही तड़प हमें अपने जीवन में सफलता पाने के लिए होनी चाहिए. सुकरात का सफलता पाने का यह दर्शन बड़ा अहम तथा व्यावहारिक है, जो अप्रत्यक्ष रूप से समय प्रबन्धन के तरीके को भी बता जाता है. आशय यह है कि यदि हम अपने जीवन के सपनों को पूरा करने के प्रति हमेशा समर्पित रहें तथा लगनशील रहें, तो कोई शक नहीं है कि हम अपने जीवन तथा समय दोनों का बड़े चमत्कारिक रूप से सदुपयोग कर सकते हैं.
           प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार प्रेमचन्द ने एक बार कहा था कि मैंने समय को बर्बाद किया और अब समय मुझे बर्बाद कर रहा है अर्थात् समय की बर्बादी जीवन की बर्वादी सरीखी है. सफलता के मुरीद तथा महत्वाकांक्षी व्यक्तियों को सबसे पहले अपने कार्यों को उचित समय पर करने की आदत का विकास करना चाहिए. दीर्घसूत्रता का त्याग करना चाहिए, क्योंकि इस दुनिया की सारी दौलतें देर-सबेर पुनः प्राप्त की जा सकती हैं, किन्तु बीता हुआ समय फिर कभी वापस नहीं आता है, तब यदि कुछ वापस आता है, तो वह है पछतावा, पछतावा और केवल पछतावा.

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