हिन्दी के पारिभाषिक कोश

हिन्दी के पारिभाषिक कोश

                     हिन्दी के पारिभाषिक कोश

हिन्दी के कोशों की परंपरा तो बहुत प्राचीन रही ही है। खालिक बारी’ को यदि अमीर खुसरो की
कृति मान लें तो हिंदी कोशों की शुरुआत 14वीं शती से मानी जा सकती है किंतु हिंदी के पारिभाषिक कोशों की परंपरा काफी बाद की है। यों तो मध्य काल में, शिवाजी ने रघुनाथ पंत से राजकाज विषयक पारिभाषिक शब्दों का ‘राजकोश’ नामक एक कोश बनवाया था, जिसमें लगभग डेढ़ हजार शब्द थे, किंतु उसे मात्र हिंदी का कोश नहीं कह सकते। पहली बार हिंदी में पारिभाषिक शब्दों पर ध्यान सन् 1800 ई. के आस-पास गया। 1809 में अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करने के लिये इंग्लैंड में एक ट्रांसलेशन सोसायटी बनी थी। इस दिशा में पहला नाम लेकिन, रोबक का लिया जाता है। जिन्होंने 1811 में ‘नौ-विज्ञान’ के पारिभाषिक शब्दों का एक अंग्रेजी हिंदी कोश प्रकाशित किया था। फिर 1843 में डाक्टर वेलन्टाइन ने भारतीय भाषाओं पर काम किया था और रसायन शास्त्र के एक संदर्भ ग्रंथ का हिंदी में अनुवाद करने के लिये हिंदी शब्दावली संस्कृत का आधार लेते हुए बनाई । सन् 1862 में सर सैयद अहमद खाँ की प्रेरणा से अलीगढ़ में एक साइंटिफक सोसायटी बनी जिसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी तथा अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छे वैज्ञानिक साहित्य का उर्दू तथा हिंदी में अनुवाद करना था। सन् 1862 में ही बाबू शिव प्रसाद सितारे हिंद ने वैज्ञानिक विषयों के लिये पारिभाषिक शब्दों की आवश्यकता महसूस की थी।
      इसके बाद 1869 से 1874 तक में वैज्ञानिक साहित्य के प्रकाशन की शुरुआत के साथ ही हिंदी के प्रचलित
पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग पर बल दिया गया था। इस दिशा में नागरी प्रचारिणी सभा ने कुछ शुरुआत की। 1898 में सभा ने वैज्ञानिक शब्दावली के लिये एक समिति बनाई जिसमें वेब्सटर के बड़े अंग्रेजी कोश से खगौल, रसायन, भूगोल, गणित, दर्शन-भौतिकी तथा राजनीतिक अर्थव्यवस्था के सभी शब्दों को सूचीबद्ध कर उनके, हिंदी पर्याय खोजने की सिफारिश की। 1902 तक सुधाकर द्विवेदी, भगवती सहाय, और माधवराव सप्रे तथा श्याम सुंदर दास जैसे लोगों के सहयोग से इन विषयों पर सच्चे अर्थों में ऐसे कार्य को अंजाम देने का यत्न किया । फलत: कई शब्दावलियाँ प्रकाशित हुई :
1. भौगोलिक पारिभाषिक शब्दावली
2. ज्योतिषशास्त्रीय शब्दावली
3. राजनीतिक अर्थशास्त्रीय शब्दावली
4. रसायनशास्त्रीय शब्दावली
5. गणितशास्त्रीय शब्दावली
6. भौतिकशास्त्रीय शब्दावली
7. दर्शनशास्त्रीय शब्दावली
    सन् 1900 में गुरुकुल कांगड़ी ने भी हिंदी पारिभाषिक शब्दावली बनाने का कार्य किया । सन् 1925 में प्रयाग विश्व विद्यालय को विज्ञान परिषद् ने पाँच हजार वैज्ञानिक शब्दों को एक शब्दावली चार खंडों में प्रकाशित की।
   सन् 1920 में सुखसंपत राय भंडारी ने ‘द ट्वेंटियेथ सेंचूरी हिंदी डिक्शनरी’ प्रकाशित की। छह खंडों के इस कोश में संविधान, कानून, शिक्षा, प्रशासन, दर्शन, मनोविज्ञान भाषा विज्ञान, गणित, प्राणि विज्ञान आदि चालीस से अधिक विषयों के अंग्रेजी शब्दों के हिंदी पर्याय तथा उनपर टिप्पणियाँ की। इसमें अंतर्राष्ट्रीय शब्द ज्यों के त्यों अपना लिये गए हैं।
    हिंदी में शब्दावली-निर्माण के क्षेत्र में डॉ० रघुवीर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है । डॉ० रघुनाथ ने ‘वृहत पारिभाषिक कोश’ (कम्प्रिहेंसिव इंगलिश-हिंदी डिक्शनरी’ के नाम से) 1955 में प्रकाशित की। इसमें लगभग दो लाख शब्द हैं।
    सन् 1945 ई० में ही डॉ० वृजमोहन ने एक गणित-कोश बनाना शुरू किया था जो सन् 1954 ई० में पूरा हुआ। इसमें लगभगक नौ हजार शब्द हैं।
                सन् 1952 ई० में उस्मानिया विश्वविद्यालय ने हिंदी टर्स ऑफ सोसियोलॉजी नामक पारिभाषिक शब्दकोश छापा।
         हिंदी साहित्य सम्मेलन ने भी लगभग पच्चीस विषयों की शब्दवलियों का निर्धारण और निर्माण करवाया। इनमें राहुल सांकृत्यायन द्वारा संपादित 1948 में प्रकाशित ‘शासन-शब्द-कोश’ बहुत अच्छा है।
         भारत सामर के राजभाषा आयोग के तहत ‘पारिभाषिक शब्द बाद में संग्रह शीर्षक से दो खंडों में 1962 और ‘वैज्ञानिक शब्दावली’ शीर्षक से 1964 में कोश प्रकाशित किये।
आधुनिक पारिभाषिक कोशों के पूर्व के कुछ अच्छे कोश ये हैं:―
1. हिन्दी वैज्ञानिक कोश (गणित) 1905-सुधाकर द्विवेदी
 
2. हिंदी वैज्ञानिक कोश (दर्शन) 1906-महावीर प्र० द्विवेदी
 
3. वैद्युत शब्दावली-केशव प्र० मिश्र तथा रामनाथ सिंह-1915
 
4. वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्द-डॉ० सत्यप्रकाश-1930
 
5. हिंदी वैज्ञानिक शब्दावली (गणित) डॉ० निहाल शरण सेठी-1931
 
6. अर्थशास्त्र शब्दावली गदाधार प्रसाद-1932
 
7. हिंदी वैज्ञानिक शब्दावली (ज्योतिष) शुकदेव पांडेय-1934
 
8. समाचार पत्र शब्दकोष-प्रो० सत्यप्रकाश-1942
 
9. आंग्ल भारतीय प्रशासन कोश-डॉ० रघुवीर-1949
 
10. भौतिक विज्ञान शब्दकोश डॉ. सत्यप्रकाश-1951
 
11. विधि शब्द-सागर-जगदीश प्र० चतुर्वेदी-1951
 
12. ए कम्प्रिहेंसिव इंग्लिश-हिंदी डिक्शनरी-डॉ० रघुवीर 1955
 
        इस सर्वेक्षण से यह ज्ञात होता है कि उपर्युक्त पयासों से हिंदी में छोटे-बड़े लगभग दो सौ पारिभषिक कोश बीसवीं सदी में प्रकाशित हो चुके थे। भारत सरकार के शिक्षा तथा संस्कृति मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी निदेशालय एवं वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर से प्रकाशित तीन प्रकार के पारिभाषिक कोश उपलब्ध हैं―
(क) वृहत पारिभाषिक शब्द-संग्रह (सात जिल्दों में) इनमें दो मानविकी के हैं, दो विज्ञान के, एक आयुर्विज्ञान के, एक इंजीनियरिंग का तथा एक कृषि-विज्ञान का । मानविकी की जिल्दों में अर्थशास्त्र, वाणिज्य, इतिहास, दर्शन, मनोविज्ञान, शिक्षा, नृविज्ञान, समाज शास्त्र, राजनीति, भाषा-विज्ञान, समालोचना, ललित कला, संगीत, पुस्तकालय-विज्ञान, डाकतार, पत्रकारिता तथा प्रशासन के शब्द हैं । विज्ञान की जिल्दों में भौतिकी, रसायन, भूगोल और भूविज्ञान के शब्द हैं।
(ख) इनके नाम ‘शब्दावली’ हैं जिनमें अलग-अलग विषयों के शब्द अलग-अलग भागों में हैं।
 
(ग) और, तीसरे प्रकार के कोश परिभाषा कोश है जिनमें स्नातक स्तर के पारिभाषिक अंग्रेजी शब्द वर्णानुसार दिए गए हैं। ये परिभाषा-कोश, क्रमश: भूविज्ञान, शिक्षा, रसायन, भौतिकी, प्राणिविज्ञान, पुरातत्व, भूगोल, अर्थमिति, अर्थशास्त्र, गृहविज्ञान आदि के है।
           रिजर्व बैंक ने भी बैंक विषयक शब्दों का संग्रह निकाला है। रेल-मंत्रालय का राजभाषा विभाग पारिभाषिक शब्दों के निर्धारण के लिये काफी समय से श्रम करके रेल विषयक पारिभाषिक शब्दों के यातायात (वाणिज्य) लेखा एवं वित्त, यांत्रिक, इंजीनियरी तथा सांख्यिकी को चार शब्दावलियाँ निकाली।
                 इनके अलावा भी पारिभाषिक शब्दों के ऐसे कोश प्रकाशित हुए हैं जिनमें अंग्रेजी पारिभाषिक शब्दों के लिए हिंदी प्रतिशब्द भी हैं तथा उनकी परिभाषाएँ और व्याख्याएँ भी, जैसे―
1. भौगोलिक शब्दकोश और परिभाषा–डॉ० अमरनाथ कपूर
 
2. गणितीय कोश–डॉ० ब्रजमोहन
 
3. पुस्तकालय विज्ञान-कोश–प्रभुनारायण गौड़
 
4. मानविकी (साहित्य) पारिभाषिक कोश–डॉ० नगेन्द्र
 
5. मानविकी (दर्शन) डॉ० नरवणे
 
6. मानविकी मनोविज्ञान–डॉ० पद्मा अग्रवाल
 
7. मैकमिलन अर्थशास्त्र कोश–महेंद्र चतुर्वेदी एवं पंत
 
इनके अलावा लगभग हर राज्य से हिंदी में पारिभाषिक कोशों के प्रकाशन की योजना के अंतर्गत प्रकाशन हुए है। इस प्रकार जहाँ तक हिन्दी के पारिभाषिक कोशों की बात है, जो कोश बने हैं उनमें कुछ को छोड़कर शेष अच्छे हैं। जरूरत यह कि सभी विषयों के परिभाषा कोश तुरंत बनें और जो पूर्व से जो प्रकाशित हैं, उनके उचित संस्कार किये जायें।

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