Upsc gk notes in hindi-12

Upsc gk notes in hindi-12

                              Upsc gk notes in hindi-12

* सूची-1 और सूची-II को मिलान कर कूट में से उत्तर चुनिए-

सूची-I
(a) पावना आन्दोलन
(b) मोप्रला राजद्रोह
(c) दक्क दंगे
(d) बारदोली आन्दोलन
सूची-II 
1. महाराष्ट्र
2 पूर्वी बगाल
3. गुजरात
4. मालाबार
5. उत्तर प्रदेश
कूट :
           (a)     (b)    (c)    (d)
(A)      5        3       4      2
(B)      4       1       2       5
(C)     2       4        1       3
(D)     3      4        1       2
नोट्स- पावना आन्दोलन (1873-76 ई.) पूर्वी बंगाल के पाबना जिले में प्रारम्भ हुआ था यह आन्दोलन जमींदारों
           के विरुद्ध किया गया था. इस आन्दोलन के महत्वपूर्ण नेताओं में ईशान चन्द्र राय एवं शभुपाल आदि थे
          मोपला विद्रोह केरल के मालाबार क्षेत्र के मोपलाओं द्वारा 1920 में यह विद्रोह किया गया प्रारम्भ में यह
          विद्रोह अंग्रेज विरोधी था बाद में हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक आन्दोलन का रूप ले लिया इस आन्दोलन
          के प्रमुख अली मुसलियार थे दक्कन विद्रोह (1874-1875 ई ) महाराष्ट्र में प्रारम्भ हुआ था. किसानों की
          स्थिति में सुधार हेतु 1879 में, दक्कन कृषक राहत अधिनियम की घोषणा की गई थी बारदोली वर्तमान
         समय में गुजरात में स्थित है सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1928 ई. में बारदोली में लगान वृद्धि के विरुद्ध
         बारदोली सत्याग्रह प्रारम्भ किया था बारदोली सत्याग्रह की सफलता पर खुश होकर बारदोली की महिलाओं
         ने उन्हें सरदार की उपाधि प्रदान की थी.

* नील दर्पण नाटक के बारे में कौनसे कथन सत्य है ?

1. यह 1860 में लिखा गया
2. इसके लेखक प्रेमचंद थे
3. दीनबंधु मित्र इसके लेखक थे
4. इसमें यूरोपियन नील के खेत के मालिकों द्वारा बंगाल के खेतिहारों का उत्पीड़न दिखाया गया है.
कूट :
(A) 1, 2 और 4
(B) 1,3 और 4
(C) 1, 2 और 5
(D) 1, 2 और 4
नोट्स- नील दर्पण नामक नाटक के लेखक दीनबन्धु मित्र थे. यह पुस्तक 1860 में लिखी गई थी इस पुस्तक से
           यूरोपियन नील के खेतों के मालिकों द्वारा बंगाल खेतिहारों के उत्पीड़न के बारे में पता चलता है इस
          आन्दोलन की शुरूआत दिगम्बर एवं विष्णु विश्वास ने की थी इस आन्दोलन की सर्वप्रथम शुरूआत
          सितम्बर 1899 में बंगाल के नदिया जिले के गोविन्दपुर गाँव में हुई.

* निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए-

1. फ्रासीसी क्राति
2. ग्लोरियस क्राति
3. स्वतंत्रता की अमरीकी लड़ाई
4. रूसी क्राति
(A) 1, 2, 3, 4
(B) 2,3,1,4
(C) 2,1,4,3
(D) 3, 2, 1,4
नोट्स- ग्लोरियस क्रांति का समय माना जाता है 1688 ई अमरीकी स्वतन्त्रता संग्राम का समय माना जाता है-
         1776 ई फ्रांसीसी क्रांति का समय माना जाता है 1789 ई रूसी क्रांति का समय माना जाता है 1917 ई.

* इनमें से कौन सुमेलित हैं ? 

उत्तर निम्नलिखित कूटों में से चुने-
1. सध्या -ब्रह्माबांधव उपाध्याय
2. बदे मातरम् – सतीशचन्द्र मुखर्जी
3 न्यू इंडिया – बिपिनचन्द्र पाल
4 डॉन – अरबिन्द घोष
(A) 1 और 2
 (B) 2 और 3
(C) 3 और 4
(D) 1 और 3
नोट्स- न्यू इण्डिया पत्रिका का प्रकाशन एवं सम्पादन ऐनी बेसेंट ने किया था बाद में बिपिनचन्द्र पाल न्यू इण्डिया
           पत्रिका से जुड़ गए थे.

* किस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया था ?

(A) रेग्यूलेटिंग एक्ट 1773
(B) चार्टर एक्ट 1813
(C) चार्टर एक्ट 1833
(D) गवर्नमेण्ट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1858
नोट्स- चार्टर एक्ट 1813 के द्वारा ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार
           समाप्त कर दिया था 1813 के एक्ट के द्वारा भारतीयों के लिए एक लाख रुपए वार्षिक शिक्षा में सुधार,
           साहित्य के सुधार एवं पुनरुत्थान के लिए और भारतीय प्रदेशों में विज्ञान की प्रगति के लिए खर्च करने
           का प्रावधान किया गया.

 * भारतीय प्रेस के मुक्तिदाता किनको कहा जाता है ?

1. सर चार्ल्स मेटकाफ
2. लॉर्ड मिंटो
3. सर थॉमस मुनरो
4. लॉर्ड मैकॉले
5. लॉर्ड वैलेजली
कूट :
(A) 1 और 3
(B) 2, 4 और 5
(C) केवल 1   
(D) 3 और 4
नोट्स- लॉर्ड बेलेजली मिंटो, लॉर्ड एडम, कैनिंग, लिटन आदि को भारतीय प्रेस की स्वतन्त्रता का विरोधी माना
           जाता है, जबकि लॉर्ड हेस्टिंग्स, बैंटिक, मैट्रकॉफ, मैकाले एवं रिपन को भारतीय प्रेस की स्वतन्त्रता का
           समर्थक माना जाता है.

* मुहम्मद गौरी की भारत विजय तथा नव-स्थापित तुर्की सल्तनत के इतिहास का प्रत्यक्ष विवरण किस ग्रंथ से मिलता है

(A) चचनाना
(B) किताब-उल-यामिनी
(C) तबकात-ए-नासिरी
(D) तारीख-उल-हिन्द
नोट्स- तबकात-ए-नासिरी मिनहाज की महत्वाकांक्षी उपलब्धि थी मिनहाज ने इस्लामी शासकों एवं सुल्तानों
          का इतिहास लिखने की योजना बनाई और आदम से आरम्भ करके नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल
         के 14वें वर्ष तक ले आए यह रचना 23 तबकों (अध्यायों) में विभक्त है जिसे वे विभिन्न क्षेत्रों के विभिन्न
         राजवंशों का अलग-अलग इतिहास प्रस्तुत करते हैं मिनहाज की पुस्तक में पहले पहले दिल्ली सल्तनत
          का काल क्रमिक क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत किया गया है बरनी ने दिल्ली सल्तनत के इतिहास को ठीक
          वहाँ से शुरू किया जहाँ मिनहाज ने अपना इतिहास समाप्त किया था सुल्तान रजिया के शासनकाल में
          वे दिल्ली स्थित नासिरिया मदरसा के मुख्य शिक्षक बनाए गए वे राजधानी के काजी नियुक्त किए गए
         और आगे चलकर रजिया के उत्तराधिकारी बहरामशाह ने पदोन्नति करके उन्हें पूरे राराज्य का काजी
          बना दिया वे उलूग खाँ (बलबन) के काफी नजदीकी थे. 1254 ई. उन्हें सद-ए-जहाँ भी बनाया गया.

* निम्नलिखित में से कौनसा सुल्तान राजस्व निर्धारण हेतु भूमि मापन से सम्बद्ध नहीं था ?

(A) अलाउद्दीन खिलजी
(B) ग्यासुद्दीन तुगलक
(C) सिकन्दर लोदी
(D) शेरशाह
नोट्स- ग्यासुद्दीन का मूल नाम गोली तुगलक अथवा गाजी बेग तुगलक था उपर्युक्त विकल्प में केवल इसी ने
           राजस्व निर्धारण हेतु भूमि की पैमाइश नहीं करवाई थी उसने कृषि में उत्पादन को प्रोत्साहन देने के
            लिए नहर सिंचाई पद्धति को प्रोत्साहन दिया वह प्रथम सुल्तान था जिसने नहर का निर्माण करवाया
            इसने डाक व्यवस्था को व्यवस्थित किया तथा हुलिया तथा दाग की प्रणाली को कठोरतापूर्वक लागू
           किया बरनी के अनुसार अलाउद्दीन ने भूमि की माप के आधार पर लगान निर्धारण के आदेश दिए इस
           पद्धति के लिए मसाहत शब्द का प्रयोग किया जाता था. भूमि की माप के आधार पर प्रति बिस्वा क्षेत्र
           की उपज के अनुसार कर निर्धारण का आदेश दिया.
                                        सिकन्दर लोदी न्यायप्रिय सुल्तान था उसने कृषि तथा व्यापार की उन्नति के लिए
          प्रयत्न किया. उसने भूमि माप के लिए अपने नाम का एक पैमाना चलाया, जो गज-ए-सिकन्दरी के नाम
         से जाना जाता है. यह पैमाना लगभग 30 इंच का होता था. इसने कृषि विकास के लिए खाद्यान्नों से जकात
         को हटा लिया था शेरशाह ने अहमद खान नामक अधिकारी को राजस्व प्रशासन के लिए अधिकृत किया.
        अहमद खान ने हिन्दू ब्राह्मणों की सहायता से भूमि की मापे करायी भूमि माप में शेरशाह ने माप की इकाई
        के रूप में गए-ए-सिकन्दरी का प्रयोग किया, जो 32 अंगुल या 3/4 मीटर होता था. शेरशाह की भूमि माप
        की पद्धति जबती पद्धति कहलाती है. जब्ती पद्धति टोडरमल पद्धति के नाम से भी जानी जाती थी.

* नन्दों को उल्लेख करने वाला प्राचीनतम अभिलेखीय प्रमाण कौनसा है ?

(A) अशोक का निगालीसामर स्तम्भ अभिलेख
(B) खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
(C) हेलियोडोरस का गरूड स्तम्भलेख

(D) गौतमी बालाश्री का नासिक गुहालेख

नोट्स- नन्दों का उल्लेख करने वाला प्राचीनतम अभिलेखीय प्रमाण खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख है शिशुनाग
           वंश के अन्त पर नन्द वंश की स्थापना हुई महापदमनन्द ने मगध को एक विशाल साम्राज्य में परिणत कर
           दिया है. भारतीय इतिहास में पहली बार एक ऐसे साम्राज्य की स्थापना हुई जिसकी सीमाए गंगा घाटी के
          मैदानों का अतिक्रमण कर गई यह विन्ध्य पर्वत के दक्षिण में विजय, वैजयन्ती फहराने वाला पहला मगध
         शासक था रवारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख से भी उसकी कलिंग विजय की पुष्टि होती है इसके अनुसार
         नन्द राजा जिन्नासन की एक प्रतिमा उठा ले गया तथा उसने कलिंग में एक नहर का निर्माण करवाया था.

*  हड़प्पीय स्थलों की खुदाइयों में ऊंट की हड्डियाँ कहाँ से प्राप्त हुई है ?

(A) कालीबंगा
(B) लोथल
(C) हड़प्पा
(D) रोपड
नोट्स- हड़प्पीय स्थलों की खुदाइयों में ऊँट की हड्डियाँ कालीबंगा से प्राप्त हुई हैं. राजस्थान के गंगानगर जिले
           में घग्घर/ नदी के बाएं किनारे पर स्थित यह सैन्धव सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल है यहाँ 1961 ई में
           बी. लाल तथा बी के थापर के निर्देशन में व्यापक पैमाने पर खुदाई की गई थी इस काल की सबसे
           महत्वपूर्ण उपलब्धि एक जुते हुए खेत की प्राप्ति है. यहाँ भी हमें ‘दुर्ग’ तथा ‘निचला नगर के रूप में
           नगर का विभाजन मिलता है दुर्ग प्रोक सैन्धव स्थल के ऊपर ही बसाया गया था. दुर्ग या गढ़ी वाले
           टीले के दक्षिणी भाग में पाँच या छ: कच्ची ईंटों के चबूतरे बने थे एक चबूतरे पर कुआँ, अग्निकुण्ड
          तथा पक्की ईंटों का बना एक आयताकार गर्न था, जिसमें पशुओं की हड्डियाँ थीं दूसरे चबूतरे पर सात
          अग्निकुण्ड या वैदिकाएं एक पंक्ति में बनी थीं. स्पष्टतः इस दुर्ग का कोई धार्मिक प्रयोजन था शायद यहाँ
          पशुबलि दी जाती हो.

* निम्नलिखित में से कौनसा राजवश शैलकृत मन्दिरों के निर्माण में अपने योगदान के लिए प्रख्यात है ?

(A) चालुक्य
(B) राष्ट्रकूट
(C) परमार
(D) चन्देल
नोट्स- राष्ट्रकूट वंशी नरेश उत्साही निर्माता थे. चूँकि इस वंश के अधिकांश शासक शैवमतानुयायी थे, अतः
           उनके काल में शैव मन्दिर एवं मूर्तियों का ही निर्माण प्रधान रूप से हुआ एलोरा एलिफैन्टा, जागेश्वरी,
           मण्डपेश्वर जैसे स्थान कलाकृतियों के निर्माण के प्रसिद्ध केन्द्र बन गए एलोस तथा एलिफैन्टा तो अपने
           वास्तु एवं लक्षण के लिए जगत् प्रसिद्ध हो गए हैं राष्ट्र राजाओं के संरक्षण में कला एवं स्थापत्य के विविध
           अंगों का पूर्ण एवं सम्यक विकास हुआ राष्ट्रकूट स्थापितों एवं शिल्पियों ने अपनी पूर्वकालीन एवं समकालीन
          अनेक कला शैलियों को ग्रहण कर अपनी अनुभूति तथा कौशल को उसमें सम्मिलित करके वास्तु एवं तक्षण
         का नया आयोत किया उनकी कृतियों में गुप्त युग की अपेक्षा अधिक विशालता, अलंकरण एवं चमत्कार
          दृष्टिगोचर होता है अनेक कला समीक्षक तो राष्ट्र वास्तु एवं स्थापत्य को ही भारतीय कला का स्वर्णिम अध्याय
          करते हैं.

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