Upsc gk notes in hindi-65

Upsc gk notes in hindi-65

                            Upsc gk notes in hindi-65

प्रश्न. भारत में वर्तमान में स्वास्थ्य क्षेत्र आवश्यकतानुरूप गतिशील नहीं है. इसे गति प्रदान करने में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका का परीक्षण कीजिए.

उत्तर – स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य
मिशन का आरम्भ किया गया था. यह एक डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक भारतीय
नागरिक को एक यूनिक स्वास्थ्य पहचान पत्र दिया जाएगा जिसमें व्यक्ति के सभी डॉक्टरों के साथ-साथ
नैदानिक परीक्षण और निर्धारित दवाओं का अंकीकृत स्वास्थ्य रिकॉर्ड सम्मिलित होगा.
एनडीएचएम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य काय योजना (NDHB) के उद्देश्यों
को व्यावहारिक रूप से लागू करेगा. NDHM एक स्वैच्छिक कार्यक्रम होगा.
इस मिशन का उद्देश्य नागरिकों के लिए सही डॉक्टरों को खोजने, मुलाकात के समय, परामर्श शुल्क
का भुगतान करने, चिकित्सीय नुस्खों के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है. इसके
साथ ही यह लोगों को सर्वोत्तम सम्भव स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने के लिए एक सुविज्ञ निर्णय लेने में
सक्षम बनाएगा.
इस योजना के छह प्रमुख घटक हैं- स्वास्थ्य पहचान पत्र (Health ID), डिजी डॉक्टर (DigiDoctor),
स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन,
इस मिशन से जापानी एनसेफलयटिस. डेंगू, मलेरिया, कोरोना वायरस आदि जैसे प्रकोपों की आसान
और प्रभावी निगरानी हो सकेगी.
सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओ का प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन हो सकेगा. वर्तमान में आयुष्मान
भारत के अलावा विभिन्न राज्यों में कई स्वास्थ्य योजनाएं चल रही हैं, परन्तु बिना एकीकरण के इनका प्रभावी
कार्यान्वन मुश्किल है. भविष्य में चिकित्सा क्षेत्रों (यथा-जीन आधारित चिकित्सा आदि) का विकास हो सकेगा.
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन सव्रत विकास लक्ष्यों को भी/ हासिल करने में मदद करेगा.

प्रश्न.
मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन), किसे कहते हैं ?

उत्तर- एम्रएफएन का शाब्दिक अर्थ होता है मोस्ट फेवर्ड नेशन, जिसे हिन्दी में सर्वाधिक तरजीही
राष्ट्र कहा जाता है. विश्व व्यापार संगठन और अन्तर्राष्ट्रीय ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक
तरजीही राष्ट्र का वज दिया जाता है. एमप्रकएन का दर्जा मिलने के साथ साथ राष्ट्र को यह आश्वासन भी
दिया जाता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा. भोरत ने पाकिस्तान को 1996 में
एमएफएन का दर्जा दिया था. शुल्क तथा व्यापार पर विश्व व्यापार संगठन के जनरल एग्रीमेंट (गैट) के
एमएफएन सिद्धांत के अनुसार, जिस पर भारत ने हस्ताक्षर/कसर किए हैं में डब्ल्यूटीओ के हर सदस्य
को एक दूसरे के साथ मोस्ट फेवर्ड ट्रेडिंग पार्टनर होने के नाते समान व्यवहार करना होता है. एमएफएन
एक तरह से किसी राष्ट्र को दिया जाने वाला स्पेशल ट्रीटमेंट होता है, यानी यह बिना भेदभाव वाला व्यापार
समझौता होता है.
एमएफएन का विकासशील देशों के लिए अलग ही महत्व है इसमें किसी भी देश के निर्यात में सहायता
मिलती है और कॉमोडिटीज का कम या बिना टैरिफ के निर्यात किया जा सकता है. MFN के कारण कई
तरह के कानूनी मसलों में फँसे बिना व्यापारिक समझौते पूरे हो जाते हैं.
इस दर्जे का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि कि आपको ऐसा ही व्यवहार उन सब देशों के लिए अपनाना होगा
जो WTO के मेंबर हैं. जिसके कारण देश की घरेलू उद्यम को काफी नुकसान होता है.

प्रश्न. अलग-थलग पड़े समुदायों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को कानूनी सहायता आसानी से उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार ने ‘टेली-लॉ’ प्रणाली का शुभारम्भ किया है. टेली-लॉ प्रणाली के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखें.

उत्तर- वर्ष 2017 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों और नागरिकों
हेतु कानूनी सहायता को सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. इस कार्यक्रम के तहत् कानूनी
जानकारी और सलाह के वितरण के लिए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग की परिकल्पना की गई
है. इस कार्यक्रम के तहत् प्रत्येक ग्राम पंचायत के स्तर पर स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर लोग टेली-
लॉ नामक पोर्टल के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वकीलों से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं.
इस तरह यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या टेलीफोन के माध्यम से वकीलों और नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक
रूप से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं.
यह कार्यक्रम विधि और न्याय मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय मिल कर संचालित
कर रहे हैं. इसके लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
द्वारा देशभर में पंचायत स्तर पर संचालित किए जा रहे सामान्य सेवा केन्द्रों (सीएससी) का इस्तेमाल किया जा
रहा है. कार्यक्रम के अंतर्गत ‘टेली-लॉ’ नाम का एक पोर्टल शुरू किया जाएगा, जो समूचे कॉमन सर्विस सेंटर
नेटवर्क पर उपलब्ध है. यह पोर्टल प्रौद्योगिकी सक्षम प्लेटफार्मों की सहायता से नागरिकों को कानून सेवा
प्रदाताओं के साथ जोड़ेगा. ‘टेलीलॉ के जरिए लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सामान्य सेवा केन्द्रों पर वकीलों
से कानूनी सहायता प्राप्त कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त लॉ स्कूल क्लिनिकों, जिला विधि सेवा प्राधिकारियों, स्वयंसेवी
सेवा प्रदाताओं और कानूनी सहायता एवं अधिकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे गैरसरकारी संगठनों को भी सीएससीज
के साथ जोड़ा गया है. राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) राज्यों की राजधानियों से वकीलों का एक पैनल उपलब्ध
कराया गया है, जो आवेदकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कानूनी सलाह और परामर्श प्रदान करते हैं.

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